Breaking NewsInternational

पाकिस्तान से होते हुये इस बार फिर भारत आयेगा ये बड़ा दु’श्मन, UNO ने जारी किया अ’लर्ट

जोधपुर. देश में एक बार फिर से टिड्डी हमले (Locust attack) की संभावना बन रही है. मानसून के अगले महीने यानी जुलाई में पाकिस्तान (Pakistan) से भारत में टिड्डी दल का हमला हो सकता है. इस बीच राहत की बात यह सामने आ रही है इनका इक्का दुक्का दल ही पश्चिमी राजस्थान (Western Rajasthan) में प्रवेश करेगा.

दरअसल अफ्रीकी देशों में इस साल टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम बेहद शानदार रहा है. लिहाजा भारत में बड़े टिड्डी दल हमले की संभावना तो नही हैं, लेकिन छोटे छोटे टिड्डी के दल पश्चिमी राजस्थान में हमला जरूर करेंगे. ईरान के दक्षिणी-पश्चिमी इलाकों में कुछ अण्डों से हॉपर निकले हैं. मानसून अनसेट होने से ये हॉपर व्यस्क होकर टिड्डी में बदलकर पाकिस्तान और बलूचिस्तान होते हुए भारत में प्रवेश करेंगे.यूएनओ ने जारी किया अलर्ट

संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन की ओर से 3 जून को जारी टिड्डी बुलेटिन के अनुसार पूर्वी अफ्रीका के इथोपिया और सोमालिया में बरसात होने से टिड्डी आबादी बढ़ी है. लिहाजा ये टिड्डियां ईरान, पाकिस्तान और बलूचिस्तान होते हुए भारत में राजस्थान बॉर्डर से प्रवेश करेगा. भारत सरकार का टिड्डी नियंत्रण विभाग इसको लेकर पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है.

कई देशों में टिड्डी दल पर ऑपरेशन जारी है

अरब प्रायद्वीप में टिड्डियों की संख्या घटने लगी है. सऊदी अरब से लगते यमन में भी हॉपर बैंड कम हो चुके हैं. इराक, जॉर्डन, सीरिया और लेबनान में टिड्डी नियंत्रण ऑपरेशन जारी है. वहां अप्रेल में कुछ छोटे टिड्डी दल पहुंचे थे. केवल ईरान में हॉपर बैंड के अलावा अव्यस्क टिड्डी के छोटे दल मौजूद हैं. इनके अगले महीने मानसून आने पर पूरब की ओर आगे बढ़ने की संभावना है. ये अफ्रीकी देशों से पाकिस्तान होते राजस्थान में दस्तक देंगे.

टिड्डियों ने गत वर्ष जमकर मचाई थी तबाही

उल्लेखनीय है कि गत वर्ष टिड्डियों ने राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में जमकर तबाही मचाई थी. किसानों की करोड़ों की फसलों को टिड्डियां चट कर गई थी. राजस्थान के आधे से ज्यादा जिले टिड्डी हमलों की चपेट में आ गये थे. यहां तक की टिड्डियों ने राजधानी जयपुर पर भी हमला बोला था. पिंकसिटी में कई बार टिड्डियों के बड़े दलों ने लोगों को डरा दिया था. इससे एकबारगी तो सरकार भी सांसें फूल गई थी. बाद में कई दिनों की कड़ी मशक्कत कर इन पर काबू पाया जा सका था.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.