हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में दो बार एकादशी तिथि पड़ती है। एक बार कृष्ण पक्ष में और एक बार शुक्ल पक्ष में। एकादशी तिथि का बहुत अधिक महत्व होता है। साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं। एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना करनी चाहिए। ज्येष्ठ माह में कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को अपरा और अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं अपरा एकादशी पूजा- विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व और सामग्री की पूरी लिस्ट…
अपरा एकादशी पूजा- विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
- घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
- भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें।
- भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
- अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
- भगवान की आरती करें।
- भगवान को भोग लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं।
- इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें।
- इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।
अपरा एकादशी मुहूर्त
- अपरा एकादशी तिथि प्रारंभ- 05 जून 2021 को 04 बजकर 07 मिनट से
- अपरा एकादशी तिथि समाप्त- जून 06, 2021 को सुबह 06 बजकर 19 मिनट पर
- अपरा एकादशी व्रत पारण मुहूर्त- 07 जून 2021 को सुबह 05 बजकर 12 से सुबह 07:59 तक
अपरा एकादशी का महत्व
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत रखने से आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है।
- इस पावन दिन व्रत रखने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है।
- धार्मिक कथाओं के अनुसार पांडवों ने भी अपरा एकादशी का व्रत किया था।
- इस व्रत को करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
एकादशी पूजा सामग्री लिस्ट
- श्री विष्णु जी का चित्र अथवा मूर्ति
- पुष्प
- नारियल
- सुपारी
- फल
- लौंग
- धूप
- दीप
- घी
- पंचामृत
- अक्षत
- तुलसी दल
- चंदन
- मिष्ठान





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