महान स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित वयोवृद्ध राम संजीवन ठाकुर ने शुक्रवार सुबह 10.30 बजे कालाबाड़ी स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे 104 वर्ष के थे। उनकी तबीयत करीब डेढ़ महीने से खराब थी। पिछले तीन दिनों से उन्होंने अन्न-जल का त्याग कर दिया था। उनके पौत्र साकेत शुभम ने बताया कि उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था। सुबह उनका निधन हो गया। उनके निधन से प्रदेश भर में शोक का माहौल है।
नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ता और अधिकारियों ने फोन और इंटरनेट मीडिया के माध्यम से शोक व्यक्त किया। उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। सबने कहा कि जिला ने अपना एक आदर्श अभिभावक खो दिया। बता दें कि राम संजीवन ठाकुर सात वर्षों तक जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा वर्तमान में वे बिहार राज्य स्वतंत्रता सेनानी संगठन, जिला स्वतंत्रता सेनानी संगठन, बिहार प्रदेश उपभोक्ता सेवा संघ, दुकान कर्मचारी संघ, बिहार प्रदेश खादी चर्मोद्योग कर्मचारी संघ, उत्तर बिहार सेनेमा कर्मचारी यूनियन, भारत वैगन राष्ट्रीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष थे। साथ ही जिला भारत सेवक संघ के महामंत्री और अखिल भारतीस श्रमिक कल्याण संघ के मंत्री भी थे।
25 वर्ष की आयु में थामी थी स्वतंत्रता संग्राम में जिले की कमान :
राम संजीवन ठाकुर ने बचपन से अंग्रेजों का जोर-जुल्म देखा था। उनके अंदर देशभक्ति की ज्वाला भड़क रही थी। देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए उन्होंने महज 25 वर्ष की आयु में 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में जिले की कमनान संभाल ली। इस आंदोलन के क्रम में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। मुजफ्फरपुर स्थित कारागार में ही उन्हें रखा गया। यहां से छूटने के बाद फिर वे आंदोलन को हवा देने लगे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से ताम्र पत्र सम्मान और पूर्व राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल के हाथों भी उन्हें सम्मानित किया गया। उन्होंने आजीवन साइकिल की सवारी कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही खादी वस्त्र ही धारण किया। किसान-मजदूरों की आवाज बन वे लगातार उनकी हक की लड़ाई लड़ी।





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