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तीसरी लहर से बच्चों को ड’राना नहीं, बचाना है /पिकू अस्पताल बचाएगा बच्चों की जान; पर जूनियर रेजिडेंट, अर्ली डायग्नोसिस व सटीक जांच की कमी करनी होगी दूर

कोरोना की तीसरी लहर का सर्वाधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। एसकेएमसीएच प्राचार्य विकास कुमार ने कहा कि इसे लेकर पूरी तैयारी है। एईएस काे लेकर यहां पर पहले से बना 100 बेड का पिकू अस्पताल इस लहर के आने पर भी बच्चों की जान बचाने में सर्वाधिक मददगार होगा। साथा ही 100 बेड का कोविड डेडिकेटेड वार्ड संचालित है और आईसीआईसीआई बैंक 100 बेड की डेडिकेटेड आईसीयू बना रहा है। ऑक्सीजन के भी 4 प्लांट लग रहे हैं, जो जून में तैयार हो जाएंगे। 93 वेंटिलेटर व 25 छोटे वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। पारा मेडिकल स्टाफ समेत दवाएं पर्याप्त हैं।

दवा खरीद को स्थानीय स्तर पर भी क्रय समिति है। एसकेएमसीएच उपाधीक्षक शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर साहनी ने कहा- दूसरी लहर में सर्वाधिक परेशानी जूनियर रेजिडेंट के नहीं रहने से हुई। यदि तीसरी लहर आती है तो इनकी सर्वाधिक आवश्यकता पड़ेगी। कहा कि सरकार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए के लिए तैयार रहने काे कहा है। 35 बेड वाले वार्ड 14 को शिशु कोविड के लिए चिह्नित किया गया है।

इसमें सभी बेड पर ऑक्सीजन है। वेंटिलेटर, एंबुलेंस पर्याप्त हैं।60 बेड का फैब्रिकेटेड वार्ड भी है। सीएस डॉ. एसके चौधरी कहते हैं कि एईएस में जैसी तैयारी की गई, वही चाइल्ड कोविड में काम आएगी। सदर अस्पताल में भी 8 बेड के विशेष वार्ड को चाइल्ड वार्ड बना दिया जाएगा। यहां 30 बेड का कोरोना वार्ड है। 6 बेड की आईसीयू भी है।

साथ ही सभी पीएचसी में 2-2 बेड के एईएस वार्ड हैं। एंबुलेंस प्रत्येक गांव से टैग है। जरूरत पड़ने पर इन सबका उपयोग किया जाएगा। दूसरी तरफ दवा पर्याप्त हैं। सदर अस्पताल में 41 चिकित्सकों की नियुक्ति की जा रही है। 100 पारा मेडिकल स्टाफ को कांटैक्ट पर रखा गया है। यदि तीसरी बेव आई तो ये सभी तैयारियां बचाव में काम आएंगी।

चुनौती बड़ी : बच्चों के लिए सेपरेट एंबुलेंस की करनी होगी व्यवस्था

तीसरी लहर की तैयारी के लिए गलतियों से सबक लेने की जरूरत होगी। पुनरावृति न हो, इसकी शपथ लेनी होगी। इसके लिए समाज, सरकार और प्रशासन सबकी सहभागिता इसमें जरूरी है। वैक्सीन लगानी-लगवानी दोनों अति महत्वपूर्ण है। सैंपल जांच व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी। सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क समेत कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। बच्चों की अर्ली डायग्नोसिस व सटीक जांच की कमियां दूर करनी होगी। हर दिन 500 से अधिक बच्चों का जिले के विभिन्न अस्पतालों में इलाज होता है। पर, बच्चों के लिए सेपरेट एंबुलेंस नहीं है। गर्भवती महिला व बच्चों के लिए 102 नंबर का एंबुलेंस संचालित है।

एसकेएमसीएच में उपलब्ध सुविधाएं 100 बेड की आईसीयू, 5 बेड का चाइल्ड कोविड केयर वार्ड 100 बेड का डेडिकेटेड कोविड वार्ड, 60 बेड का एईएस वार्ड 10 एंबुलेंस की उपलब्धता के साथ-साथ चार लाइफ सपोर्ट 532 पारा मेडिकल और 166 सीनियर रेजिडेंट हैं उपलब्ध सदर अस्पताल से स्वास्थ्य केंद्रों तक 30 बेड का एमसीएच में कोविड केयर वार्ड संचालित 06 बेड की आईसीयू और 08 बेड का है एईएस वार्ड 41 चिकित्सक और 100 पारा मेडिकल स्टाफ नियुक्त 07 एंबुलेंस सदर अस्पताल व हर पीएचसी में एक-एक पंचायतों में एक-एक एंबुलेंस टैग, 24 घंटा कंट्रोल रूम सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 2-2 बेड के विशेष वार्ड।

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