बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसी की बात नहीं सुनी. न तो सहयोगी जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी की और न एनडीए में सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के नेताओं की. सीएम नीतीश कुमार ने विपक्ष की मांग पर भी कोई ध्यान नहीं दिया. उन्होंने एक साथ सबकी मांग खारिज करते हुए बीच का रास्ता निकाल लिया. मुख्यमंत्री ने न तो पंचायतों का कार्यकाल ही बढ़ाया और न प्रशासक की ही नियुक्ति की. चुनाव नहीं होने की स्थिति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वार्ड , पंचायत समिति, पंचायत और जिला परिषद में परामर्श समिति तैनात करने का निर्णय लिया.
सीएम नीतीश के इस फैसले पर जीतनराम मांझी ने धन्यवाद दिया है.जीतन राम मांझी ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ की है. उन्होंने लिखा है समय पर पंचायत चुनाव नहीं होने के कारण पंचायतों में परामर्श समिति का गठन करने जैसे कैबिनेट फ़ैसले लेने के लिए मा.@NitishKumar जी को धन्यवाद. परामर्श समितियों में वर्तमान पंचायत सदस्यों के साथ-साथ विधायक प्रतिनिधि भी शामिल होंगें जिससे गाँवों का विकास बाधित नहीं होगा. #लोकतंत्रकीजय
दरअसल नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक समाप्त हुई. इस बैठक में पंचायत को लेकर बड़ा फैसला लिया गया. कहा गया कि सरकार पंचायत परामर्श समिति की नियुक्ति करेगी. 15 जून को पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा हो रहा है. उसको ध्यान में रखते हुए कैबिनेट में यह फैसला लिया गया. जिसका जीतन राम मांझी ने स्वागत किया है.


Input : Live cities



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