राज्य के पूर्व मंत्री अजीत कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर तूफान (यास) एवं अतिवृष्टि (मूसलाधार बारिश) के कारण किसानों की फसल क्षति एवं गरीबों का ध्वस्त हुए आशियाना (मकान ) का सर्वे कराकर शीघ्र मुआवजा भुगतान करने की मांग की है।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि एक तरफ कोरोना के भय से लोग बेहद परेशान हैं। लॉकडाउन के कारण घर में दुबके लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विगत तीन दिनों से हो रही घनघोर बारिश, तेज हवा व तूफान से मुजफ्फरपुर एवं वैशाली जिले की पूरी आबादी तंग- तबाह हो गयी है। इस तूफान से सबसे ज्यादा नुकसान किसान- मजदूर व समाज के कमजोर वर्ग के लोगो का हुआ है। पूरा जनजीवन अस्त -व्यस्त हो गया है।
प्रशासन द्वारा राहत- बचाव एवं पुनर्वास के दावों की जमीनी सच्चाई भयावह है। कहीं भी कोई अधिकारी नोटिस लेने को तैयार नहीं है। कृषि अधिकारी पल्ला झाड़ते हुए कह रहे हैं कि सरकार से अभी तक कोई निर्देश नहीं मिला है। यह स्थिति बेहद दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।
पूर्व मंत्री ने लिखा है कि तीन दिनों के इस तूफान में लीची, केला, साग-सब्जी एवं मक्का की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गयीं। लीची- केला उत्पादक किसान व व्यापारी खासे परेशान हैं। हजारों हेक्टेयर में तैयार दलहन (मुंग)की फसल तो पूरी तरह बर्बाद ही हो गयी है। दोनों जिलों में बड़े पैमाने पर गरीबों की झोपड़ी क्षतिग्रस्त हुई है। इस तूफान से लगभग 70% फसल की बर्बादी हुई है। फसल क्षति एवं ध्वस्त झोपड़ी का सर्वे कराकर शीघ्र मुआवजा देना जरूरी है।
यदी ऐसा शीघ्र नहीं हुआ तो लोग आर्थिक तंगी का शिकार हो जाएंगे। क्योंकि इस राज्य के किसान लगातार पिछले कई वर्षों से प्राकृतिक आपदा का शिकार होते आ रहे हैं। वे आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं।
पूर्व मंत्री ने 24 घंटे के अंदर दोनों जिलों में प्रखंड स्तर पर कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी का टीम गठित कर क्षति का आकलन कराने और एक सप्ताह के अंदर प्रभावित किसानों को मुआवजा का भुगतान कराने की मांग की है। यदी ऐसा शीघ्र नहीं हुआ तो इस बार खरीफ फसल बुरी तरह प्रभावित हो जाएगी।
उन्होंने पत्र की प्रति कृषि मंत्री,
आपदा प्रबंधन मंत्री, दोनों जिलों के डीएम और जिला कृषि पदाधिकारी को भी भेजी है।





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