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मुजफ्फरपुर : जिलों के 2.5 लाख उपभोक्ताओं को रोज दुग्ध एवं उत्पाद उपलब्ध कराने वाला तिमुल की फैक्ट्री जल जमाव से त्रस्त

बिहार राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ (काॅम्फेड) की ईकाई तिमुल (तिरहुत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0, मुजफ्फरपुर) जिसमें 07 जिले मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी एवं प0 चम्पारण, गोपालगंज तथा सिवान के लगभग 02 लाख दुग्ध उत्पादक जुड़े है जिनसे प्रतिदिन औसतन 2.5 लाख लीटर दूध प्रतिदिन प्राप्त कर, प्रसंस्कृत एवं पैकिंग कर दूध एवं दुग्ध उत्पादों के रुप में कार्यक्षेत्र जिलों के 02 से 2.5 लाख उपभोक्ताओं को रोज दुग्ध एवं उत्पाद उपलब्ध कराने वाला तिमुल की फैक्ट्री जल जमाव से त्रस्त है।

आई०एस०ओ० एवं अन्य स्टैण्डर्ड मानकों पर शत-प्रतिशत खड़ा उतरने वाली संस्था आज विवश हो अपने उद्वारकों की बाह जोह रही है जिनके माध्यम से पानी निकास की समस्या का समाधान हो सके। मुजफ्फरपुर डेयरी अपने स्थापना काल से स्टैण्डर्ड ऊॅचाई पर विभिन्न सुरक्षा मानकों के अन्तर्गत निर्मित हेै। लेकिन डेयरी परिसर के तीनों तरफ राष्ट्रीय राजमार्ग एवं एक तरफ रेलवे लाईन के कारण ऊॅचाई बढ़ जाने एवं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा सड़क से नीचे की ओर गिरने वाले पानी का उचित निपटान नहीं बनाने के कारण सारा पानी डेयरी कैम्पस में जमा हो जाता हैै।

संघ के पदाधिकारियों ने जल निकासी के स्थायी निदान के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष स्थानीय एवं राज्यस्तरीय पदाधिकारी, मंत्री एवं अन्य राजनेताओं विभागों से कई बार अनुरोध एवं संपर्क करते रहा है मगर अभी तक परिणाम शून्य है।

यदि पानी निकासी का उचित प्रबंध नहीं हुआ तो लाखो लोगों के जीवन यापन से जुड़ी बिहार का जीवंत एवं उपयोगी सहकारिता की मिशाल धूमिल होगी जिसका सीधा असर दुग्ध उत्पादकों के साथ-साथ उपभोक्ताओं एवं इससे जुड़े हजारों श्रमिकों एवं व्यवसायियों पर भी पड़ेगा।

संघ के प्रबंध निदेशक श्री एच० एन सिंह ने कहा कि तिमुल अपने संसाधन से स्थायी समाधान के लिए सक्षम नहीं है। इससे राज्य सरकार, जिला प्रशासन एवं राष्ट्रीय राज्यमार्ग प्राधिकरण तीनों के संयुक्त प्रयास से हीं सड़क किनारे पक्का नाला अथवा पाईप नाला का निर्माण करते हुए वर्षा जल को बाहर नहर या फरदो नाला में गिराया जा सकता है। राजमार्ग प्राधिकरण यदि सड़क से गिरने वाले पानी को रोक लेता तो इस प्रकार की समस्या से डेयरी को जूझना नहीं पड़ता। जमा पानी के कारण कुछ दिनों बाद बदबू फैलने का डर रहता है जिसका असर आस-पास के ग्रामीणों पर पड़ता है एवं इनका आक्रोश भी अनावश्यक रुप से डेयरी को भुगतना पड़ता है।

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