सबला कार्यक्रम के तहत गया जिले के इमामगंज ब्लॉक में समर्थ संस्थान और द पैड प्रोजेक्ट द्वारा सैनिट्री पैड उत्पादन केंद्र खोला गया है, जहां फरबरी 2021 से महिलाएं पैड बनाने का कार्य कर रही है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य- स्थानीय स्तर पर महिलाओं को सैनेट्री पैड उपलब्ध कराना, महिलाओं में मासिक धर्म प्रबंधन के विषय में जागरूकता फैलाना एवं महिलाओं के लिये स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है।
सबला कार्यक्रम मुख्य रूप से अभी गया जिले के इमामगंज एवं बांके बाज़ार जैसे पिछड़े एवं नक्सल प्रभावित ब्लॉक के गांवो में मासिक धर्म संबंधित जागरूकता फैलाने का काम कर रही है।
6 महिलाओं की टीम द्वारा रानीगंज सैनिटरी पैड सेन्टर पर लगातार पैड बनाने का काम चल रहा है, साथ ही साथ ये महिलाएं गांवो में जा कर मीटिंग के माध्यम से मासिक धर्म प्रबंधन पर जागरूकता फैला रही हैं, एवं गांव की महिलाओं और लड़कियों को सेन्टर पे बने पैड भी प्रतिपुष्टि के लिये इस्तेमाल करने दे रही हैं।
टीम लोगों को न सिर्फ पैड इस्तेमाल करने देती हैं, बल्कि ये भी बताती है कि पैड कैसे इस्तेमाल करना है, कैसे इस्तेमाल किये हुए पैड को सही तरीके से नष्ट करना है, और कपड़े के जगह पैड इस्तेमाल करने के क्या क्या फायदे है।

सबला केन्द्र पर बने पैड बाइओडिग्रेड्डबल और रसायन मुक्त हैं, जो इसे बाजार में उपलब्ध अन्य पैड से अलग बनाता है, क्योंकि इससे महिलाओं के शरीर या हमारे पर्यावरण को कोई नुकसान नही पहुँचता हैं।
हमारे द्वारा गांवो में वितरित किये गए पैड का काफी सकारात्मक प्रभाव हुआ है, न सिर्फ लोगों को पैड बहुत पसंद आया बल्कि गांवो की बहुत सारी महिलायें समर्थ के साथ मिल कर जागरूकता अभियान एवं पैड बनाने में भी रुचि ले रही है।

ब्लॉक स्तर पर सैनिट्री पैड के उत्पादन से न सिर्फ माहवारी से जुड़ी पूरानी रूढ़िवादी सोच और वर्जनाओं पर प्रभाव पड़ा है बल्कि गांवो में महिला सशक्तिकरण के नए अध्याय शुरू हुए है। सबला कार्यक्रम के जगरूकता अभियान के तहत हमलोगों ने लगभग 1000 महिलाओं को मासिक धर्म प्रबंधन के लिए जागरूक किया।
बांके बाज़ार और इमामगंज मिला के लगभग 25 गांवो में हमलोगों ने जागरूकता अभियान चलाया है, जिसमें न सिर्फ महिलाओं एवं लड़कियों ने बल्कि पुरुषों ने भी इस कार्यक्रम में पूरा सहयोग दे कर इसे सराहा है.





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