कोरोना महामारी के चलते बिहार समेत कई राज्यों में लगे लॉकडाउन का असर मुजफ्फरपुर के लीची उत्पादक किसानों पर भी पड़ रहा है. अपने स्वाद और खुशबू के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध मुजफ्फरपुर की शाही लीची को बाजार में भेजने में परेशानी हो रही है, जिससे किसान निराश हैं. दूसरी ओर लीची के किसानों के लिए सुखद खबर भी है. बिहार की शाही लीची को फाइटोसैनिटरी सर्टिकिकेट मिला है. इससे शाही लीची को पूरी दुनिया में पहचान मिली है. अब शाही लीची को विदेशों में निर्यात करने में आसानी होगी. पहले लीची विदेश तो जाती थी, लेकिन नाम बिहार का नहीं होता था. निर्यातकों को फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था.लेकिन अब ऐसा नहीं होगा वही शाही लीची की पहली खेप बीते सोमवार को ब्रिटेन एक्सपोर्ट की गई.पहली खेप में 523 लीची के कार्टून भेजे गए हैं जिसने मुजफ्फरपुर की लीची है, जिससे किसानों में खुशी है
आपको बता दे कि शाही लीची का जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग बिहार को पहले से ही मिला हुआ है. इसको लेकर जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने खुशी जताते हुए कहा कि इसके लिए लीची के किसानों और कृषि विभाग को शुभकामनाएं दी है और कहा कि मुजफ्फरपुर की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों ने जाना है. इसे विदेशों में निर्यात करने के लिए सर्टिफिकेट भी प्राप्त हुआ है,और आने वाले दिनों में भी हम लोग चाहेंगे कि मुजफ्फरपुर की पहचान और लीची का कई और देशो में निर्यात हो
दअरसल, कृषि उत्पादों को निर्यात करने के लिए फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट की जरूरत होती है. इससे तय होता है कि कृषि उत्पाद जिस देश में भेजा जा रहा है वह वहां के लोगों के सेहत के लिए ठीक है. इसमें कोई हानिकारक कीट-बैक्टीरिया आदि नहीं है. बिहार के पास पहले किसी कृषि उत्पाद को फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट देने का अधिकार नहीं था. निर्यातक यह सर्टिफिकेट मुंबई या कोलकाता से लेते थे. इसके चलते बिहार के उत्पाद को बंगाल या महाराष्ट्र के उत्पाद के रूप में निर्यात किया जाता था.


Input : Live cities



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