पूरे देश में कोराेना के संक्रमण के कारण अस्पतालों में जगह नहीं बची थी। ऑक्सीजन की कि’ल्लत से लोग दम तोड़ रहे थे। ऐसे में उदयपुर में एक फर्नीचर व्यापारी ऐसा था, जिससे लोगों की यह पी’ड़ा नहीं देखी गई। उन्होंने 300 से ज्यादा घरों में ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचा दिए।
कोरोना संक्रमण के इस दौर में मरीजों के उपचार के लिए प्राणवायु ऑक्सीजन की किल्लत देश भर में बढ़ गई है। ऐसे में कुछ लोग मरीजों की मजबूरी का फायदा उठा आपदा को अवसर में बदल ऑक्सीजन की कालाबाजारी कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं। जो जरूरतमंद लोगों की इस समस्या का समाधान करने में जुटे हैं। इन्हीं में से एक है उदयपुर के मुकेश शर्मा। जो बीते 2 महीने में 300 से अधिक जरूरतमंद लोगों के घर-घर जाकर ऑक्सीजन सप्लाई कर चुके हैं।
उदयपुर के रहने वाले मुकेश ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर अस्पतालों में जगह नहीं बची थी। ऐसे में कुछ मरीज घर पर रहकर भी अपना उपचार कराने को मजबूर थे। लेकिन उनके पास ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में मैंने 2 अप्रैल से घर-घर ऑक्सीजन पहुंचाने की शुरुआत की। जिसके लिए सबसे पहले मैंने कुछ ऑक्सीजन सिलेंडर इकट्ठा किए और जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध करवाएं।

जरूरतमंद लोगों के घर ऑक्सीजन सिलेंडर रखते मुकेश शर्मा।
मांग बढ़ी तो मांगा प्रशासन से सहयोग
मुकेश ने बताया कि शुरुआती दिनों में ऑक्सीजन सप्लाई करने के बाद मेरे पास काफी जरूरतमंद लोगों के फोन आने लगे थे। उस वक्त मरीज ऑक्सीजन की किल्लत से दम तोड़ रहे थे। ऐसे में उन लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए मेरे पास खाली सिलेंडर तो थे। लेकिन उनमें भरने के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद हमने जिला प्रशासन से सहयोग मांगा। तो जिला प्रशासन द्वारा भी हमें सरकारी रेट पर ऑक्सीजन रिफिल करने की सुविधा दी गई। जिसके बाद हम जरूरतमंद मरीजों के ऑक्सीजन सिलेंडर को जिला प्रशासन के रिफिल सेंटर से निशुल्क भरने का काम भी कर रहे हैं।
ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए प्रदेश भर से लोग आ रहे उदयपुर
मुकेश ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में हालात इतने बिगड़ गए कि न सिर्फ उदयपुर बल्कि जयपुर, जोधपुर, पाली, बाड़मेर, बीकानेर समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों से भी लोग अपने निजी वाहनों से ऑक्सीजन लेने के लिए उदयपुर पहुंचे हैं। जिनकी हमने मदद की है। इसके साथ ही हम मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ उपयोग में लिए जाने वाले उपकरण भी निशुल्क उपलब्ध करवा रहे हैं। ताकि घर बैठे कोरोना संक्रमित मरीज का उपचार हो सके।
मरीज के दस्तावेज के आधार पर देते हैं ऑक्सीजन
मुकेश ने बताया कि महामारी के इस दौर में कुछ लोग कालाबाजारी कर रहे थे। ऐसे में हम जरूरतमंद लोगों की मेडिकल रिपोर्ट और आधार कार्ड लेते हैं। जिसके आधार पर हम सरकारी रिकॉर्ड में उनकी एंट्री करवाते हैं। इसके बाद ही उन्हें ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई जाती है। जिसके लिए मरीज और उनके परिजनों को परेशान नहीं होना पड़ता। मैं और मेरी टीम के सदस्य ही उनके घर से दस्तावेज एकत्रित कर उनके घर पर ही ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाने का काम करते हैं।

ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ ही मुकेश जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाते हैं अन्य उपकरण।
ऑटो से पहुंचाते हैं ऑक्सीजन
मुकेश ने बताया कि उनका फर्नीचर का व्यवसाई है। लेकिन लॉक डाउन की वजह से फिलहाल पूरा काम ठप हो गया है। जिसके चलते वह अपने संसाधनों का उपयोग कर लोगों के घर-घर ऑक्सीजन पहुंचा रहे हैं। इसके लिए मैं ऑटो चालक मनीष मेघवाल का सहयोग भी ले रहे हैं। जो पिछले लंबे समय से मुकेश के साथ मिल घर-घर ऑक्सीजन पहुंचाने में उनकी मदद कर रहा है।
ऑटो चालक मनीष ने बताया कि हालात काफी बिगड़ गए हैं। ऐसे में मैं भी जरूरतमंद लोगों के घर-घर जाकर ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए मदद में शामिल हुआ। ताकि कुछ लोगों की जिंदगी को बचाया जा सके। आर्थिक रूप से कमजोर मनीष ने कहा कि काफी लोग इस दौरान ऐसे भी मिले जो ऑटो किराया देने में भी असमर्थ थे। जहां से मैंने किराया भी नहीं लिया है। क्योंकि इस दौर में मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।



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