नई दिल्ली. कोरोना संकट के कारण पहले ही आर्थिक चुनौतियों (Financial Challenges) का सामना कर रहे आम आदमी को एक और झटका लगने वाला है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services) की रिपोर्ट के मुताबिक, कमोडिटी की कीमतें बढ़ने के कारण जुलाई 2021 से कंज्यूमर अप्लायंसेज (Consumer Appliances) 10-15 फीसदी तक महंगे हो सकते हैं. कोरोना वायरस की दूसरी लहर को थामने के लिए कई राज्यों में लॉकडाउन से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स समेत गैर-जरूरी आइटम्स की बिक्री फिलहाल बंद है. वहीं, कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी (Commodity Prices Hike) हो रही है.
ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेस में इस साल हुई बढ़ोतरी
अप्लायंसेज बनाने वाली कंपनियों ने कुछ कंपोनेंट्स की कमी और मेटल के ग्लोबल प्राइसेज बढ़ने के कारण फरवरी 2021 में प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाई थीं. अब लॉकडाउन के कारण इन कंपनियों की बिक्री बहुत घट गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेज में बढ़ोतरी हुई है. कोर कमोडिटी सीआरबी इंडेक्स (CRB Index) अप्रैल 2021 में साल-दर-साल आधार पर 70 फीसदी चढ़ गया है. इससे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडस्ट्री पर असर पड़ेगा. सीकेएस स्मार्ट इक्विटी के कंज्यूमर गुड्स एनालिस्ट वरुण खोसला ने कहा कि कंज्यूमर गुड्स की डिमांड बहुत कम है. इसके उलट कच्चे माल की लागत बढ़ रही है. इंडस्ट्री कीमतें बढ़ाने के लिए एक महीने का इंतजार कर सकती है. आखिर में बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर ही डालना होगा.
कंपोनेंट्स महंगे होने के कारण बढ़ाई जाएंगी कीमतें
एयर कंडीशनर, रेफ्रीजरेटर, वॉशिंग मशीन जैसे प्रोडक्ट्स की कीमतें जल्द बढ़ सकती हैं. इन प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स के साथ ही कमोडिटी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. बजाज इलेक्ट्रिकल्स ने कहा है कि कमोडिटी की कीमतें बढ़ने और मांग कमजोर रहने के बावजूद कंपनी चौथी तिमाही में अच्छे नतीजे देने में सफल रही है. कंपनी ने बताया कि लागत अधिक होने के कारण वह जल्द ही प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा सकती है.





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