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अमर शहीद राजेन्द्र सिंह की पत्नी सुरेश देवी का नि’धन / CM नीतीश से जुड़ी हैं खास यादें, जानें…

पटना. अमर शहीद राजेंद्र प्रसाद की पत्नी सुरेश देवी का निधन हो गया है. 99 वर्ष की सुरेश देवी ने दानापुर स्थित अपने पैतृक आवास पर रात करीब 11.50 बजे अंतिम सांस ली. 1942 की क्रांति के महानायक से जुड़ी यादें फिर से ताजा हो गईं. बता दें कि राजधानी पटना में विधानसभा परिसर के बाहर स्थापित 7 मूर्तियों में से एक अमर शहीद राजेंद्र सिंह की भी मूर्ति है. राजेन्द्र सिंह पटना हाई स्कूल में 10वीं कक्षा के छात्र थे और सारण जिले के बनवारी गांव के रहने वाले थे. आजादी के दीवाने राजेंद्र प्रसाद 11 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान पटना के सचिवालय पर तिरंगा झंडा फहराने के दौरान अंग्रेजों की गोलियों से शहीद हुए थे. सुरेश देवी के निधन की खबर की जानकारी मिलते ही सीएम नीतीश कुमार ने शोक व्यक्त किया और उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मना के साथ करने का निर्देश दिया.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुरेश देवी के निधन पर दुख जताते हुए शोक संदेश में कहा है कि 11 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान राजेंद्र सिंह ने अपने जीवन का बलिदान दिया था. सुरेश देवी धर्मपरायण और कर्तव्यपरायण महिला थीं. उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा. वहीं, निधन की खबर सुन पहुंचे बीजेपी सांसद राम कृपाल यादव ने कहा कि सुरेश देवी ममता की प्रतिमूर्ति थीं. हम सबसे बहुत स्नेह करती थीं. मुझे उनके अंतिम संस्कार के दौरान कंधा लगाने का मौका मिला.

पाटलिपुत्र से भाजपा के सांसद रामकृपाल यादव ने अमर शहीद राजेंद्र सिंह की पत्नी सुरेश देवी की अर्थी को कंधा दिया.


सुरेश देवी के निधन से उनके परिवार समेत पूरे इलाके में शोक की लहर है. लोगों का कहना है कि सुरेश देवी सभी को अपने बच्चों की तरह प्यार करती थीं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनका विशेष स्नेह रहा है. नीतीश कुमार को उपहार के तौर पर वह कपड़े और जलेबी भी भेजा करती थीं. साल 2020 के विधानसभा के चुनाव के एग्जिट पोल से वह तब काफी दुखी भी हो गई थीं जब उन्होंने  यह खबर सुनी कि एग्जिट पोल में नीतीश कुमार को कम सीटें आ रही हैं और उनका सीएम बनना मुश्किल है. यह सुनकर उन्हें बुखार भी आ गया था, लेकिन जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बन गए वह उठ कर बैठ गईंं और नीतीश कुमार को बधाई भी दी थी.

‘परिवार के लिए यशोदा मैया थीं सुरेश देवी’

सुरेश देवी की भतीजी ममता देवी बताती हैं कि 14 वर्ष की उम्र में वह विधवा हो गई थीं. शादी के महज ढाई महीने के बाद ही उनके पति राजेंद्र प्रसाद शहीद हो गए, जिसके बाद वह अपने मायके में ही रह गईं. उन्होंने अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण किया. सुरेश देवी की भतीजी ममता देवी कहती हैं कि घर के सभी बच्चों को लालन-पालन उन्होंने ने ही किया है. वे हमारे परिवार की मालकिन थीं. हम सब ने उनका नाम यशोदा मैया रखा था.

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