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समस्या : लगातार ऑनलाइन स्टडी व घर में रहने से चिड़चिड़ा हो रहे बच्चे, कभी भाई-बहन से तो कभी पैरेंट्स से बहस

राहुल 12वीं का छात्र है। उसे इस बात की चिंता सता रही है कि बोर्ड परीक्षा होगी भी या नहीं। ऑनलाइन स्टडी से उसके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ रहा है। घर में कभी भाई से तो कभी बहन से लड़ाई होती है। अचानक व्यवहार में आए इस बदलाव से पैरेंट्स की चिंता बढ़ रही है। कभी वह मां तो कभी पिता से बहस करने लगता है। सीबीएसई की ओर से शुरू की गई हेल्पलाइन पर कई पैरेंट्स और स्टूडेंट्स ऐसी समस्याओं को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। सीबीएसई के काउंसेलर डॉ प्रमोद कुमार ने बताया कि कोरोना संकट में लगातार ऑनलाइन स्टडी और घर में कैद रहने से बच्चे अब गुस्सैल हो रहे हैं। ऐसी शिकायतें लगातार मनोदर्पण, उमंग किशोर हेल्पलाइन पर आ रही है। स्टूडेंट्स फिक्रमंद हैं कि उनकी परीक्षा होगी भी या नहीं। होगी तो उसका स्वरूप क्या होगा। ऐसे ढेर सारे सवालों की जानकारी वे लेना चाह रहे हैं।

बच्चे इन पर करें फोकस
अपनी दिनचर्या को पहले से ज्यादा क्रिएटिव बनाएं
पसंदीदा गाना सुनें, फिल्म देंखें। अगर इंस्ट्रूमेंट बजाएं
कोई नया स्किल सीखें, इससे अनावश्यक दबाव नहीं आएगा
घर की छतों पर सुबह में हल्की एक्सरसाइज करें
नकारात्मक माहौल और सोच से खुद को अलग रखें
भविष्य के बारे में ज्यादा मत सोचें।

काउंसेलर बाले- बच्चों को अपना एंगर मैनेजमेंट करना जरूरी है
काउंसेलर डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि इस समस्या का हल पैरेंट्स-शिक्षक और स्टूडेंट्स तीनों को मिलकर हल करना होगा। एंगर मैनेजमेंट यानी अपने गुस्से पर काबू पाने के लिए उन्हें इसका कारण ढ़ूंढ़ कर डायरी में लिखना चाहिए। किसी तरह की परेशानी होने पर पैरेंट्स से बात करें। कभी भी बच्चे को घंटों तक टीवी, लैपटॉप, स्मार्ट फोन या सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करने दें। जहां तक संभव हो उन्हें समाजीकरण की प्रक्रिया में शामिल करें। सुबह-सुबह योग करें। हर वक्त केवल ऑनलाइन स्टडी नहीं करें। संगीत सुनें। प्रेरणादायी कहानियां पढ़ें और आत्मविश्वास बनाए रखें।

टॉपर्स को अपनी रैंक खराब होने की टेंशन
10वीं में टॉपर्स बच्चों को रैंक खराब होने की भी टेंशन है। उन्हें लग रहा है कि अगर जनरल प्रमोशन हो गया तो उनकी प्रतिभा का उचित मूल्यांकन नहीं होगा। काउंसेर की मानें तो इस तरह के ख्याल को लेकर भी ज्यादातर बच्चे चिंतित हैं। ऐसे में पैरेंट्स को खास ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों को हर वक्त पढ़ाई की बात नहीं कर बल्कि उनकी हॉबी व पसंद-नापसंद के बारे में बातें करें।

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