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‘हिमालय के रक्षक’ सुंदरलाल बहुगुणा के नि’धन पर सीएम नीतीश ने जताया दु’ख; कहा- पर्यावरण के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति

हिमालय के रक्षक के नाम से ख्यातिलब्ध पर्यावरणविद् व पद्मभूषण सुंदरलाल बहुगुणा का आज शुक्रवार की दोपहर में कोरोना से निधन हो गया. उन्होंने 93 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली. इन्हें 8 मई को एम्स ऋषिकेश में एडमिट कराया गया था. उनके निधन की जानकारी उत्तराखंड एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल ने दी. उनके निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक जताया है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट कर अपनी शोक संवेदना प्रकट की. उन्होंने लिखा- ‘चिपको आंदोलन के प्रणेता एवं वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध सुंदरलाल बहुगुणा का निधन अत्यंत दुखद है. पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके द्वारा महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है. उनके निधन से पर्यावरण के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है. ईश्वर उनकी आ’त्मा को शांति प्रदान करें.’

गौरतलब है कि पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा आठ मई को कोरोना पॉजिटिव हुए थे. इसके बाद उन्हें एम्स में एडमिट कराया गया था. तबीयत अधिक बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में लाइफ सपोर्ट में रखा गया था. उनके रक्त में ऑक्सीजन की परिपूर्णता का स्तर कल गुरुवार की शाम से लगातार गिर रहा था. आज दोपहर बाद करीब 12 बजे पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा ने अंतिम सांस ली. उस समय उनके पुत्र राजीव नयन बहुगुणा एम्स में ही मौजूद थे. पर्यावरणविद बहुगुणा का अंतिम संस्कार ऋषिकेश गंगा तट पर राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अनुयायी रहे सुंदरलाल बहुगुणा ने 13 वर्ष की उम्र में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था. वर्ष 1949 में मीराबेन व ठक्कर बाप्पा से बहुगुणा की भेंट हुई थी. मंदिरों में दलितों को प्रवेश का अधिकार दिलाने के लिए प्रदर्शन करना शुरू किया. समाज के लोगों के लिए काम करने हेतु बहुगुणा ने 1956 में शादी की थी. इसके बाद उन्होंने राजनीतिक जीवन से संन्यास ले लिया था. इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी विमला नौटियाल के सहयोग से पर्वतीय नवजीवन मंडल की स्थापना की. इसके बाद चिपको आंदोलन शुरू किया. वे वृक्ष मित्र, हिमालय के रक्षक समेत कई नामों से प्रसिद्ध थे. स्वतंत्रता संग्राम में भी उनका अहम रोल रहा था. उन्हें सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया था.

Input : Live cities

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