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जिन गांवों में न डॉक्टर न हॉस्पिटल, वहां मरीजों के लिए भगवान बने हेल्थ-वर्कर

पटना. बिहार समेत देश के महानगरों और छोटे शहरों में कहर बरपाने के बाद अब कोरोना महामारी का संक्रमण गांवों में फैलने की खबरें आ रही हैं. बिहार की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच इसको लेकर चिंताएं भी जताई जा रही हैं. खासकर जिन गांवों में न हॉस्पिटल है और न ही डॉक्टर, वहां पर कोरोना संक्रमण की रोकथाम बड़ी चुनौती है. लेकिन प्रदेश के कई गांवों में इस चुनौती का सामना करने के लिए कम्युनिटी हेल्थ-वर्कर्स की फौज तैनात है. जी हां, ये हेल्थ-वर्कर झोलाछाप डॉक्टर नहीं हैं, बल्कि नेशनल ओपन स्कूल यानी NOIS से कम्युनिटी हेल्थ-वर्कर की ट्रेनिंग लेकर कुछ युवा गांवों में आजकल कोरोना से लड़ाई में अहम भूमिका निभा रहे हैं. राज्य सरकार की मदद से ट्रेनिंग लेने वाले ऐसे 21000 युवा इन दिनों गांवों में मरीजों के लिए ‘भगवान’ साबित हो रहे हैं.

पटना शहर से सटे परसा पंचायत के छतना गांव की बात करें तो 1000 से 1200 की आबादी वाले इस गांव में न तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है और न ही कोई डॉक्टर. यहां के लोगों को इलाज कराने के लिए पुनपुन जाना पड़ता है, जो करीब 10 किलोमीटर है. मर्ज गंभीर हो तो फिर पटना का पीएमसीएच ही एकमात्र उपाय है. ऐसे में गांव के लोग अगर बीमार पड़ते हैं, तो उनके लिए सबसे बड़ा आसरा रामप्रकाश हैं, जो एक कम्युनिटी हेल्थ-वर्कर हैं. कोरोनाकाल में सरकार की पहल के बाद अब गांव के लोग रामप्रकाश को झोलाछाप डॉक्टर नहीं कहते, इससे उन्हें खुशी मिलती है. वे मामूली खर्च पर लोगों का इलाज करते हैं.

परसा जैसे गांव की यह तस्वीर, एक नहीं है, बल्कि बिहार में कई ऐसे गांव हैं, जहां इन दिनों बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में ये हेल्थ-वर्कर जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभा रहे हैं. इनके पास डॉक्टर की डिग्री तो नहीं है, हां NOIS से कम्युनिटी हेल्थ-वर्कर की ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट है. सरकार ने 21000 लोगों को इसकी ट्रेनिंग दिलाने में मदद की है. पटना के संपतचक प्रखंड के कंडाप गांव में ऐसे ही हेल्थ वर्कर मनीष भी पिछले कई वर्षों से गांव और आसपास के लोगों का इलाज कर रहे हैं. मनीष कहते हैं कि किसी भी बीमारी से परेशान लोग पहले उनके पास पहुंचते हैं.

CM नीतीश ने भी दिया था निर्देश
बिहार में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी को देखते हुए बीते दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया था कि वह ग्रामीण इलाकों में कम्युनिटी हेल्थ वर्कर का सहयोग ले. कोरोनाकाल में आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को घर पर ही निगरानी की जरूरत होती है. ऐसे में ये हेल्थ-वर्कर वरदान साबित होते हैं. सीएम ने विभाग को निर्देश भी दिया था कि इन हेल्थ-वर्करों को मरीजों के घर पर रोजाना जाकर उनका निरीक्षण करने, ऑक्सीजन लेवल और तापमान की जांच का निर्देश दिया जाए, ताकि मरीज की हालत गंभीर होने पर तत्काल उसे बेहतर इलाज मुहैया कराया जा सके. होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की निरंतर देखभाल से उन्हें किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं होगी और उसका अच्छा परिणाम आएगा.

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