कोरोना संक्रमण के बीच अपनी जान की सुरक्षा के बीच घर आने वाले मजदूर एक बार फिर महानगरों की पलायन के रास्ते पर हैं. महीनों से बेरोजगार मजदूरों के समक्ष जब आर्थिक संकट ने मुंह फाड़ा तो मजबूरी में उन्हें एक बार फिर से अपनी सुरक्षा दांव पर लगाते हुए महानगरों की ओर जाने की विवशता खड़ी हो गई है. यह विकट स्थिति इन दिनों मुजफ्फरपुर जिले में नजर आ रही है.
राज्य में लॉकडाउन की घोषणा है. लेकिन तमाम बंदिशों के बीच हर रोज हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के जिलों से वापस पंजाब, मुंबई, कोलकाता और दिल्ली लौट रहे हैं. बिहार सरकार ने प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने का वादा तो किया लेकिन रेलवे स्टेशन पर मजदूरों की भीड़ से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि राज्य सरकार रोजगार देने के मामले में अभी तक फैल्योर साबित हो रही है.
पिछली बार घर लौटे मजदूर अपनी जान की सुरक्षा को देखते हुए कमाने के लिए बाहर जाना नहीं चाह रहे थे. कई कंपनियों ने खुद के वाहन और खर्च से इन मजदूरों का मान-मनौव्वल करके बुलाया था. लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल विपरित है. भुखमरी की चौकट पर खड़े मजदूर अपनी जान की सुरक्षा को दांव पर लगाकर रोजगार के लिए बाहर पलायन करने लगे हैं. जब इन मजदूनों से पलायन करने के बाबत जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी में रोजगार ठप रहा. अब घर में भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. ऐसे में वह मजबूरी में दूसरे राज्यों और शहरों के लिए जा रहे हैं.





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