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सांसों को सुकून / मुजफ्फरपुर में एक्टिव केस और कोरोना संक्रमण दर दाेनों कम, ऑक्सीजन प्लांटों पर मरीज के परिजनों का दबाव भी पहले की अपेक्षा आधा हुआ

कोरोना के कहर के बीच राहत देने वाली खबर है कि अब ऑक्सीजन के लिए पहले जैसी मारामारी नहीं है। संक्रमण दर में गिरावट और एक्टिव केस कम होने से ऑक्सीजन प्लांट पर भी दबाव कम हुआ है। पिछले सप्ताह तक घरों में इलाज करा रहे मरीजों के परिजनों के साथ ही अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन भी सिलेंडर रीफिलिंग के लिए आ रहे थे। इनकी संख्या साै-सवा साै तक हाेती थी। घंटों लाइन में लगने के बाद इन्हें ऑक्सीजन मिलती थी। लेकिन, प्लांट प्रबंधक की मानें तो दो-तीन दिनों से संख्या घट कर 50 से 55 हो गई है।

अब घरों में इलाज करा रहे कई मरीजों की स्थिति में सुधार हुआ है। सोमवार को रामबाग से रीफिलिंग के लिए आए आशुतोष ने कहा कि 10 दिनों से लगातार ऑक्सीजन ले जा रहे हैं। अब दिन भर में एक सिलेंडर से काम चल जा रहा है। पहले तीन-तीन छोटे सिलेंडर की जरूरत पड़ती थी।

भर्ती मरीजों की सेहत में सुधार से निजी अस्पतालों पर भी दबाव घटा

निजी अस्पतालों से भी इसका दबाव घटा है। डॉ. एके दास ने बताया कि मरीजों की सेहत में सुधार से कम सिलेंडर में भी काम निकल जा रहा है। प्रसाद हॉस्पिटल के संचालक ने कहा कि उनके पास सिलेंडर के दो सेट हैं। अशोका हॉस्पिटल के डॉ. सुभाष के अनुसार कई मरीज रिकवर होने की स्थिति में हैं। किसी मरीज को प्रति मिनट 10 से 15 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत होती है, तो किसी को 7 से 8 लीटर प्रति मिनट से भी काम चल जाता है।

एसकेएमसीएच में अधिक गंभीर मरीजों के कारण जद्दोजहद | एसकेएमसीएच में ऑक्सीजन के लिए मरीज के परिजनों को अब भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। हालांकि, यहां पर 10 मई को भर्ती 180 मरीजों की तुलना में सोमवार को 90 मरीज ही थे। लेकिन, ये सभी ऑक्सीजन पर हैं।

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