नई दिल्ली. कोविड-19 (Covid-19) की पहली लहर (First Wave) के दौरान सोशल मीडिया पर अक्सर साल 2020 को कोसा जाता था. महामारी से खिन्नता के कारण 2021 के स्वागत के दौरान भी 2020 को लेकर कई ट्विटर ट्रेंड हुए थे. लेकिन अब एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल कोविड-19 महामारी कहीं ज्यादा घातक साबित हो सकती है. भारत अभी जिस तरह कोरोना की दूसरी लहर में फंसा है उसे देखकर इसका अंदाजा भी किया जाता है. भारत के साथ ही अब जापान भी महामारी की जबरदस्त चपेट में आ गया है और देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई है.
अब विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अधानोम गेब्रियेसुस ने चेताया है-हम लोग इस महामारी के दूसरे साल में हैं. और ये पहले साल से कही ज्यादा घातक साबित हो सकती है. इसके साथ ही WHO ने अमीर राष्ट्रों से अपील की है कि वह बच्चों के टीकाकरण के बारे में फिर से विचार करें. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन देशों को राय दी कि इसके बजाय वह कोवैक्स योजना के तहत गरीब देशों को कोविड-19 वैक्सीन दान करें.
फिर शंका के घेरे में आया चीन
इस बीच दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों के एक समूह ने कहा है कि वायरस के चीन के लैब से लीक होने की थ्योरी को खारिज नहीं किया जा सकता. वर्ष 2019 के आखिर में चीन में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला सामने आया था. उसके बाद से इस वायरस ने वैश्विक स्तर पर 30 लाख से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाया है. अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है और सात बिलियन इंसानों की जिंदगी पटरी से उतर गई है.
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में क्लिनिकल माइक्रोबॉयलॉजिस्ट रवींद्र गुप्ता और फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर में विषाणुओं के विकास पर अध्ययन करने वाले जेसी ब्लूम सहित 18 वैज्ञानिकों ने कहा है कि महामारी की उत्पत्ति को लेकर और ज्यादा रिसर्च की आवश्यकता है. वैज्ञानिकों के समूह में शामिल स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में माइक्रोबॉयोलॉजी के प्रोफेसर डेविड रेलमैन ने साइंस जर्नल को लिखे पत्र में कहा है कि चीन के लैब से वायरस के लीक होने या पशुओं से वायरस के निकलने की थियरी को खारिज नहीं किया जा सकता.
WHO की जांच पर भी सवाल
वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कोरोना वायरस संक्रमण की उत्पत्ति और फैलने के बारे में वुहान में की गई जांच में सभी पहलुओं का ध्यान नहीं रखा गया है




Leave a Reply