चारा घोटाला मामले में जेल से रिहा होने के बाद लालू यादव इनदिनों दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं. इस दौरान वो बिहार समेत देश और दुनिया की राजनीतिक हलचल भी नजर बनाए हुए हैं. खासकर बिहार की स्थिति और यहां की सरकार पर उन्होंने अपनी निगाह काफी पैनी रखी है. इसलिए तो इनदिनों वो सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार नीतीश सरकार की कार्यशैली पर कटाक्ष कर रहे हैं. 9 मई को उन्होंने अपनी पार्टी के सभी जीते-हारे विधायक और पदाधिकारियों के साथ वर्चुअल संवाद कर कोरोना काल में लोगों की सेवा करने की नसीहत दी थी. अब ट्वीट कर लगातार नीतीश सरकार पर हमला बोल रहे हैं.
अभी-अभी, उन्होंने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा “कोरोना और बिहार सरकार में कुछ समानताएँ है, दोनों जन जीवन के लिए ख़तरनाक हैं और दोनों अदृश्य (नज़र नहीं आते) है।“. इसके पहले भी लालू यादव ने कोरोना को लेकर केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लिया था. उन्होंने ट्वीट कर केन्द्र की मोदी सरकार हमला बोलते हुए कहा था कि 1996-97 में जब हमलोगों की सरकार थी तो पोलिया टीकाकरण युद्ध स्तर पर कराकर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया था, लेकिन वर्तमान समय में पैसे लेकर भी लोगों को एक टीका तक मयस्सर नहीं हो रहा है.
उधर बक्सर जिले के चौसा प्रखंड अंतर्गत महादेवा घाट के पास गंगा नदी में ला’शों का अंबार लालू प्रसाद ने ट्वीट कर कहा कि, कहां ले जा रहे है देश और इंसानियत को ?. उन्होंने कहा कि ‘जीते जी दवा, ऑक्सीजन, बेड और ईलाज नहीं दिया. मरने के बाद लकड़ी, दो गज कफ़न और ज़मीन भी नसीब नहीं हुआ. दुर्गति के लिए शवों को गंगा में फेंक दिया. कुत्ते लाशों को नोच रहे है. हिंदुओं को दफ़नाया जा रहा है. कहां ले जा रहे है देश और इंसानियत को ?’
बता दें कि सोमवार को बिहार में बक्सर जिले के महादेव घाट पर 4 दर्जन से अधिक लाशें एक किलोमीटर के दायरे में बिखरी पड़ी थीं. कई लाशों को कुत्ते नोचकर खा रहे थे. संदेह जताया जा रहा था कि जिन लोगों की कोरोना काल में घर में ही मौत हो गयी, उन्हें गंगा किनारे परिजनों द्वारा फेंक दिया गया होगा.




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