Breaking NewsUTTAR PRADESH

महामारी से माई बना कोरोना गांवों में पूजा पाठ के जरिये हो रही मनाने की कोशिश

आजमगढ़. एक दौर था जब अंधविश्वास में पड़कर लोग चेचक (मिजिल्स) का प्रकोप होने के बाद छोटी माता और बड़ी माता बताकर पूजा करते थे अब कोरोना महामारी भी को भी कोरोना माई (मां) की नाराजगी बताया जा रहा है। क्या शहर क्या गांव हर जगह कोरोना माई की पूजा हो रही है। ओझा सोखा भी इसका खूब फायदा उठा रहे है। महिलाओं के साथ मिलकर पूजा पाठ कराने के नाम पर मनमानी वसूली हो रही है। कोरोना को गांव से निकालने के लिए बैंडबाजे के साथ उसे गांव के सरहद तक पहुंचाया जा रहा है। इस दौरान सोशल डिस्टेसिंग की खुलकर धज्जी उड़ाई जा रही है।

बता दें कि जिले में कोराना संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक डेढ़ सौ से अधिक लोग मौत का ग्रास बन चुके है। गांवों में अन्य बिमारियों से हो रही मौत को भी कोरोना संक्रमण से जोड़कर देखा जा रहा है। इस समय शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा संक्रमण गांवोें में अधिक दिख रहा है जिसके कारण लोगों पर अंधविश्वास हाबी होता जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग इसे प्रकृति का प्रकोप मानने लगे हैं।

भ्रांतियां किस हद तक बढ़ चुकी है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि शहर से लेकर गांव तक लोग पूजा पाठ के जरिये कारोना संक्रमण को रोकने में जुट गए है। खासतौर पर महिलाओं ने कोरोना को माई का नाम दे दिया है। गांवों में सप्ताह भर कोरोना की पूजा हो रही है इसके बाद डिह के स्थान पर बकायदा कोरोना माई को कढ़ाई चढ़ाने के बाद निकारा किया जा रहा है।

आज सुबह-सुबह कोरोना माई को खुश करने के लिए कपसा मडयां, सिकरौर, पुष्पनगर, बस्ती, ओहदपुर, आदि गांवों में डिह स्थान अथवा खेत में पूडी, हलवा चढ़ा कर और पूरब दिशा में धार देकर महिलाएं कोरोना माई को प्रसन्न करती नजर आयी। पूजा पाठ के लिए ओझा व ब्राह्मणों की भी मदद ली गयी। महिलाओं का कहना है कि कोरोना माई नाराज हो गई हैं। इसलिए जनहानि में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। माई को खुश करके ही इसे रोका जा सकता है। इसलिए माता को खुश करने के लिए वे पूजन अर्चन कर रही है।

आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष एसके सत्येन का कहना है कि अंधविश्वास में पड़कर लोगे समाज में भ्रांतियां फैला रहे है। कहीं न कहीं इसके लिए सोशल मीडिया जिम्मेदार भी जिम्मेेदार है। सोशल मीडिया पर भ्रांति फैला रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए वहीं पूजा कर रही महिलाओं को जागरूक करने की जरूरत है। समाजवादी नेता लालजीत यादव का कहना है कि महिलाएं अंधविश्वास में पड़कर महामारी को धर्म से जोड़ रही है। इन्हें जागरूक करने की जारूरत है। वहीं प्रशासन इस मामले में पूरी तरह अनिभिग्य बना हुआ है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.