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ममता की जीत से विपक्ष में खुशी की लहर! 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए जगी उम्मीदें

नई दिल्ली. धमाकेदार जीत दर्ज करने के बाद ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) तीसरी बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनने जा रही है. उनकी इस जीत से विपक्षी दलों में खुशी की लहर है. विपक्ष के कई नेताओं ने बीजेपी को हराने पर उन्हें बधाई दी है. जीत के बाद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा कि ये लड़ाई उन्होंने सिर्फ बंगाल के लिए नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए जीती हैं. सवाल उठता है कि आखिर ममता की जीत से विपक्षी दल के नेता इतने ज्यादा खुश क्यों हैं.

जीत के बाद जैसे ही ममता का भाषण खत्म हुआ विपक्ष के कई नेताओं ने केंद्र सरकार को एक संयुक्त चिट्ठी लिखी. इसके तहत मुफ्त वैक्सीन और ऑक्सिजन की मांग की गई. चिट्ठी लिखने वालों में ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, सोनिया गांधी, तेजस्वी यादव, शरद पवार, हेमंत सोरेन, मायावती और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेता शामिल हैं.

ममता रोकेंगी मोदी को?
इस जीत के बाद कांग्रेस के सीनियर नेता मनीष तिवारी ने ममता को ‘झांसी की रानी’ कहा, जबकि उनकी पार्टी को केरल में करारी हार का सामना करना पड़ा. सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ट्विटर पर ममता को बधाई देने वाले नेताओं की बाढ़ सी आ गई है. हालत ये है कि विपक्षी दल के नेता ममता की जीत का हर तरफ जश्न मना रहा है. दरअसल ममता की इस जीत ने विपक्ष के लिए उम्मीदें जगा दी है. उन्हें लगता है कि वो 2024 लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के सफर पर ब्रेक लगा सकती हैं.

शिवसेना के खेमे में भी खुशी
बातचीत करते हुए शिवसेना के एक नेता बताया, ‘अगर ममता हार जाती, तो हमारी सरकार भी गिर सकती थी या फिर एक हफ्ते के अंदर मुश्किल में आ जाती. लेकिन अब उनती जीत से बीजेपी कुछ वक्त के लिए ठंडा पड़ जाएगी.’


ममता देंगी करारा जवाब!
बंगाल में ममता की सीधी लड़ाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से थी. अब इस जीत के बाद उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया है. आने वाले दिनों में वो पीएम मोदी को सीधी टक्कर दे सकती हैं. हालांकि जीत के बाद ममता ने जो भाषण दिए उसमें उन्होंने बीजेपी के खिलाफ कोई हमला नहीं किया. लेकिन आने वाले दिनों में ममता के तीखे तेवर सामने आ सकते हैं. वो चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के तरफ से लगाए गए आरोपों का करारा जवाब दे सकती हैं.

क्या ममता को मिलेगा विपक्ष का साथ?
2019 के लोकसभा चुनाव में ममता ने एनडीए को कड़ी टक्कर देने के संकेत दिए थे. वे कई गैर-भाजपा नेताओं जैसे कि अरविंद केजरीवाल (AAP), तेजस्वी यादव (RJD) और अन्य के संपर्क में थीं. लेकिन उस वक्त विपक्ष एकजुट नहीं हो सका था. बनर्जी खुद भी पश्चिम बंगाल चुनावों में उलझ गईं थी. इस वक्त शरद पवार विपक्ष के सबसे वरिष्ठ नेता हैं. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वो ज्यादा पुराने हो गए हैं. ममता बनर्जी को महिला होने का फायदा मिल सकता है. कई लोगों को लगता है कि एक महिला मोदी को टक्कर सकती है. हालांकि कमजोर हिंदी और सीमित राष्ट्रीय अपील का उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है. लेकिन बड़ी जीत के बाद हालात बदल सकते हैं.

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