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मौ’त से पहले बेटी की शादी रचाई, वर-वधू को आशीर्वाद दे दुनिया को कहा अलविदा

दिल्ली से सटेइंदिरापुरम के शिप्रा सनसिटी सोसायटी निवासी एक पिता की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए आखिरी सांसों के वक्त बेटी की शादी रचाई गई। पिता ने बेटी और दामाद को आशीर्वाद दिया और फिर दुनिया को अलविदा कह दिया। आखिरी इच्छा तो पूरी हुई, लेकिन बेटी की डोली उठने से पहले पिता की अर्थी उठी। कभी यहां पर परिवार में शादी का माहौल था। इस घटना के बाद परिवार समेत पूरी सोसायटी में मातम छा गया।

शिप्रा सनसिटी सोसायटी में राजकुमार बेटा-बेटी और पत्नी के साथ रहते थे। उनकी दोनों किडनी खराब थीं। उनकी पत्नी ने उन्हें एक किडनी दी थी और ट्रांसप्लांट भी हुआ था, लेकिन हालत सुधर नहीं रही थी। पिछले दिनों उन्होंने अपनी बेटी पारुल की विजय नगर निवासी एक युवक से शादी तय थी। शादी की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। घर पर मेहमान भी आए थे। 29 अप्रैल की रात में मेंहदी की रस्म भी चल रही थी। परिवार में सब खुश थे। इस दौरान राजकुमार अचानक गिर गए। उन्हें कोरोना के लक्षण थे और उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा था। स्थानीय पार्षद संजय सिंह ने बताया कि राजकुमार को आनन फानन में सोसायटी के क्लब हाउस के बेसमेंट में ले जाया गया, जहां पर कंसंट्रेटर मशीन से उन्हें ऑक्सीजन दिया जाने लगा। इसके बाद परिवार में सदस्य सकते में आ गए।

इलाज के लिए भटकता रहा परिवार

जिस बेटी की हाथ में मेंहदी लगी थी। वह बेटी अपने परिवार व रिश्तेदारों के साथ पिता की जान बचाने के 29 अप्रैल की रातभर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकती रही। वहीं, लड़की के मंगेतर ने भी होने वाले ससुर के लिए रात भर अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन कहीं भी बेड नहीं मिला।

अंतिम इच्छा पूरी करने को कराई शादी 

पार्षद संजय सिंह का कहना है कि वह एओए टीम के साथ रातभर राजकुमार को बचाने लिए उनके पास रहे। साथ में उन्होंने एक डॉक्टर और टेक्निशियन की भी व्यवस्था की थी। राजकुमार को चिंता थी कि उनकी बेटी की शादी अब कैसे होगी? कहीं उनकी बीमारी की वजह से उनकी बेटी की शादी न रुक जाए? डॉक्टरों के मुताबिक चिंता करने से रक्त चाप बढ़ रहा था। संजय सिंह ने लड़के पक्ष से बातकर लड़के व उनके अभिभावकों को बुलाया। सोसायटी के मंदिर से पुजारी जयमाल लेकर पहुंचे। इसके बात मंत्रोच्चारण के साथ जयमाल हुआ। राजकुमार ने बेटी की शादी देखी और बेटी व दामाद को आशीर्वाद दिया। इसके बाद वह आंखें बंद करने लगे। उन्हें एक अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाया जाने लगा। सोसायटी से बाहर निकलते ही राजकुमार सबको अलविदा कह गए। इसके बाद परिवार समेत पूरी सोसायटी का माहौल गमजदा हो गया।

जांच कराई थी रिपोर्ट नहीं आई

संजय सिंह ने बताया कि 22 अप्रैल को सोसायटी में उन्होंने जिला प्रशासन की मदद से कोरोना जांच शिविर लगवाया था। राज कुमार ने जांच कराई थी, लेकिन आठ दिन बाद भी उनकी कोरोना रिपोर्ट नहीं आ सकी। इससे पहले उनकी मौत हो गई।

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