कोरोना वैश्विक महामारी के कारण शहरों में रोजगार छीन रहा है। मजदूर भागकर गांव में आ रहे तो यहां काम नहीं मिलता। मनरेगा योजना से भी मजदूरों को काम नहीं मिल रहा। ऐसे हालात में नौतन प्रखंड के पुरंदरपुर के किसान कृष्णदेव चौधरी केले की खेती कर न सिर्फ खुद आर्थिक रूप से समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं। बल्कि गांव के 15 मजदूरों को रोजगार भी दिया है। कई प्रवासी मजदूरों ने ठेले पर केले की बिक्री करने का कार्य भी आरंभ किया है। आय भले हीं सीमित है। लेकिन प्रवासी मजदूरों की रोजी- रोटी का जगाड़ हो रहा है। कृष्णदेव चौधरी एक साधारण किसान हैं। कम खेत वाले किसानों के लिए उन्होंने एक नया प्रयोग किया है। यहां मुख्य रूप से धान, गन्ना, गेहूं एवं दलहन की खेती किसान करते हैं। बाढ़ एवं सूखाड़ से धान एवं गेहूं की खेती ठीक से नहीं हो पाती। गन्ने की खेती में मिलों में आपूर्ति एवं भुगतान को लेकर बड़ी समस्या है। ऐसे में उन्होंने खेती से अच्छी आमदनी के लिए फिलहाल छह एकड़ खेत में केले की खेती की है। इससे सलाना 20 लाख रुपये की आमदनी हो रही है। उनके खेत में आकर बेतिया, बगहा, मोतिहारी और गोपालगंज के व्यापारी केले को खरीदकर ले जा रहे हैं।





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