काेराेना से म’रने वालाें के श’व के दाह सं’स्कार के लिए अस्पताल के सफाईकर्मी मोटी रकम वसूल रहे हैं। काेराेना संक्र’मित की माै”त के बाद एसकेएमसीएच काेराेना वार्ड के बाहर अंत्येष्टि के लिए 25 से 40 हजार रुपए की डिमांड हाेती है। बुधवार काे इसी माेल-जाेल के कारण वार्ड में ही काफी देर तक एक ला’श पड़ी रही।
दोपहर बाद रुपए का इंतजाम कर मृ’तक के परिजन पहुंचे। फिर सिकंदरपुर श्मशान में अं’त्येष्टि हाे सकी। कई दिनाें से काेराेना वार्ड के बाहर पुलिसकर्मियों की आंखों के सामने यह सबकुछ हो रहा है। फिर भी कोई राेकने-टाेकने वाला नहीं है। पी’डि़ताें का कहना है कि कोरोना का नाम सुन कर ही कोई मदद करने को तैयार नहीं होता। अंत्येष्टि में शामिल होना तो दूर की बात है। ऐसे में अस्पताल से श्म’शान घाट तक अकेले कुछ कर नहीं सकते। इसलिए सफाईकर्मी जाे रकम मांगते हैं, देनी पड़ती है। दूसरी ओर, अधीक्षक डॉ. बाबू साहेब झा कहते हैं कि एसकेएमसीएच में मौ’त के बाद घर या श्म’शान घाट के लिए शव वाहन मुफ्त मिलता है। बाहर लोग क्या कर रहे हैं, यह उन्हें पता नहीं है।
कहा- एसकेएमसीएच में रहा ताे मर जाऊंगा और म’र भी गया
औराई के रतवारा निवासी 19 साल के जिस काेराेना संक्र’मित ने कहा था कि एसकेएमसीएच में भर्ती रहा ताे ‘मर जाऊंगा, वह वाकई म’र गया। हालांकि, वह अब निगेटिव हाे चुका था। फिर भी यहां इलाज अाैर सफाई में लापरवाही का अाराेप लगा डिस्चार्ज कराने की गुहार लगाई थी।
बुधवार की सुबह से रात 11 बजे तक एसकेएमसीएच के कोविड वार्ड में उसकी लाश पड़ी रही। वजह वही, पैसे नहीं हाेना। अंतत: रात 11 बजे आजमगढ़ से उसका भाई पहुंचा। बाद में अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने मामले की शिकायत कंट्रोल रूम में की। इसके बाद अस्पताल से शव वाहन मिला। लेकिन, असामाजिक तत्व मृतक के परिजनों से उलझ गए। शव वाहन में बॉडी नहीं रखने दे रहे थे। वे पैसे मांग रहे थे। परिजनों ने मामले की डीएम से शिकायत की। उन्होंने कार्रवाई का भरोसा दिलाया।





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