लखनऊ. मेडिकल पत्रिका लांसेट की रिपोर्ट (Lancet Report) के बाद कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर और हाहाकार मच गया है. लोग एक दूसरे को मैसेज भेजकर पत्रिका की रिपोर्ट के आधार पर यह बता रहे हैं कि कोरोना का वायरस हवा में भी फैल गया है. हाल यह है कि लोग एक दूसरे को सलाह दे रहे हैं कि बंद जगहों पर या घर में भी मास्क लगाकर रहना जरूरी है. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि एसी और कूलर चलाना इस वक्त बहुत घातक है क्योंकि हवा में तैर रहा कोरोना का वायरस उसके जरिये घर में आ सकता है और आप संक्रमित हो सकते हैं.
कुल मिलाकर इस रिपोर्ट के बाद लोगों में ऐसी फीलिंग आ गयी है कि कोरोना का वायरस हवा में बिल्कुल वैसे ही उड़ रहा है जैसे मक्खी या मच्छर या फिर धूल के कण. आखिर इसकी क्या सच्चाई है और लोगों को अपने बचाव के लिए और क्या करना चाहिए. इसपर न्यूज़ 18 ने लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के विशेषज्ञ से विस्तार से बातचीत की है. प्रोफेसर शैलेन्द्र सक्सेना सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च में हेड हैं और वायरस की गतिविधियों को अच्छे से समझते हैं.
सवाल: आज एक नयी रिसर्च की बड़ी तेज चर्चा है कि कोरोना का वायरस मुख्य रूप से हवा से फैल रहा है. इसे अपनी तरह से परिभाषित करें क्योंकि बहुत से लोगों को लगने लगा है कि कोरोना का वायरस वैसे ही हवा में उड़ रहा है जेसे मक्खी और मच्छर या प्रदूषण के कण?
जवाब: इंसान जब छींकता, खांसता या तेज आवाज में बोलता है तो उसके मुंह से ड्रॉपलेट्स तेजी से बाहर आते हैं. यह ड्रॉपलेट्स अलग-अलग आकार की होती हैं. बड़ी बूंदें पांच माइक्रोन से ज्यादा होती हैं. यह मुंह से बाहर निकलने के साथ ही जमीन पर तेजी से गिर जाती हैं. इनके साथ ही निकलने वाली पांच माइक्रोन से छोटी बूंदें हवा में कुछ समय तक तैरती रह सकती हैं. हवा बहने की ओर यह आगे भी बढ़ सकती हैं. कोरोना जैसे श्वसन प्रणाली पर हमला करने वाले वायरस आम तौर पर मुंह से निकलने वाली बड़ी ड्रॉपलेट्स के साथ ही बाहर निकलते हैं.
हवा से संक्रमण का खतरा तब होता है जब किसी संक्रमित व्यक्ति के नाक या मुंह से निकली हवा में तैरने वाली ड्रॉपलेट्स न्यूक्लियाई (बहुत छोटी) किसी सतह पर गिरने से पहले ही किसी इंसान द्वारा सांस के जरिये अपने अंदर ले ली जाये. किसी सतह पर गिर जाने के बाद संक्रमण का खतरा बहुत कम हो जाता है. हां, यह जरूर है कि ड्रापलेट की तुलना में ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई देर तक हवा में रह सकता है. बता दें कि टीबी की बीमारी ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई के जरिये ही फैलती है.
सवाल: यदि कोई संक्रमित व्यक्ति जिसमें लक्षण हों, वो हमारे सामने न हो तब भी हमें कोरोना से संक्रमित होने का खतरा है क्या?
जवाब: यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने बचाव के लिए बताये गये उपायों पर कितना और कैसे अमल किया है. यदि किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसते, छींकते या बातचीत के दौरान कोरोना का वायरस उसके मुंह या नाक से बाहर आ रहा है और यदि उसने मास्क लगा रखा है तो ऐसा कर के किसी दूसरे में संक्रमण के फैलाव को रोका जा सकता है. ऐसे में जब कोई संक्रमित व्यक्ति हमारे सामने है ही नहीं तो हमें संक्रमण का कोई रिस्क नहीं है. कोरोना का वायरस सबसे ज्यादा समय तक स्टील या प्लास्टिक पर जिंदा रहता है. स्टील पर 5-6 घंटे जबकि प्लास्टिक पर 6-8 घंटे.
सवाल: लोगों में यह बात तेजी से चर्चा में आ गयी है कि घर में भी मास्क लगाकर रहना होगा, ऑफिस में जहां कोई भी न हो वहां भी बराबर मास्क लगाये रखना होगा, इसमें कितनी सच्चाई है, क्या लोग घरों में भी मास्क लगाकर रहें?
जवाब: यदि परिवार के किसी सदस्य को कोरोना हो गया हो और आप उसी घर में रह रहे हैं तो मास्क लगाने की जरूरत है. बाकी किसी को घर में रहने के दौरान मास्क लगाने की कोई जरूरत नहीं है.
सवाल: समझदार लोग मास्क लगा रहे हैं, बार-बार हाथ धो रहे हैं, लोगों से दूरी बनाकर रह रहे हैं, क्या इसके अतिरिक्त भी कोई सावधानी लेने की जरूरत आ गयी है अब?
जवाब: मास्क, बार-बार हाथ धोना और लोगों से दूरी बनाकर रहना संक्रमण से बचाव के सबसे बेहतर उपाय हैं. इतना बहुत है.
सवाल: तेजी से संक्रमण दर बढ़ने के क्या कारण हैं?
जवाब: लोगों ने बचाव के उपायों पर सही तरीके से अमल नहीं किया. दूसरी तरफ, वायरस ने भी समय के साथ अपने आप को चेंज किया है यानी उसमें म्यूटेशन हुआ है. उसने म्यूटेशन कर के एक व्यक्ति से दूसरे में फैलने की अपनी क्षमता को बढ़ा लिया है. आशंका यह भी है कि वैक्सीन देने के बाद इंसानी शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी से अपने आप को बचाने के लिए भी वायरस ने अपने में बदलाव कर लिये हैं.
सवाल: एसी और कूलर चलाने से लोग अब डरने लगे हैं. जब से यह कहा गया है कि वायरस हवा में फैला हुआ है, इस पर क्या कहना है?
जवाब: यदि आपके आसपास या बेहद करीब कोई कोरोना से संक्रमित नहीं है तो एसी और कूलर चलाने में कोई दिक्कत नहीं है.








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