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खुदा की इबादत में नन्हें मुन्नों ने रखा रोजा, कोरोना के खात्मे की मांगी दुआ

सीतामढ़ी। रमजान का रोजा बड़ों के साथ-साथ मासूम बच्चे भी रख रहे हैं। कई बच्चों की जिदगी का यह पहला रोजा है। तपती धूप और गर्मी से बेपरवाह बच्चों ने अल्लाह और उसके रसूल की रजा हासिल करने के लिए भूख और प्यास की शिद्दत बर्दाश्त कर पूरी दुनिया से कोरोना के खात्मे की दुआ की। आजाद चौक मेहसौल के मासूम वासिफुल्लाह व राफिया खानम अल्लाह की मोहब्बत में जिदगी का पहला रोजा रखकर उनकी इबादत कर रहे हैं। वहीं मेहसौल पूर्वी पंचायत के वार्ड नंबर 5 निवासी शिक्षक रेहान अहमद एवं शिक्षिका निकहत जहां के तीन बच्चे रोजा रखकर कोरोना के खात्मे की दुआ मांगी। मेहसौल पूर्वी पंचायत के वार्ड नंबर 5 निवासी शिक्षक मो. रेहान अहमद एवं शिक्षिका निकहत जहां के मुताबिक उनके तीन बच्चे रोजा रख अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। 11 वर्षीय पुत्र मो. यासिर नेहाल पिछले कई वर्षों से रोजा रखते आ रहे हैं। यासिर का कहना है कि अब मुझे रमजान का इंतजार रहता है। रमजान में रोजा रखकर इबादत करने का सवाब बहुत है। इसलिए मैं माह-ए-रमजान की कद्र करता हूं। वहीं 9 वर्षीय पुत्री निशात फातिमा का कहना है कि मैं पिछले वर्ष से रोजा रख रही हूं। पिछले वर्ष रम•ान में धूप और तपिश थी। इफ्तार के समय सिर्फ पानी पीने का दिल करता था, जबकि इस बार उतनी धूप नहीं है। रमजान आसानी से गुजर रहा है। पंरतु कोरोना को लेकर पिछले वर्ष जैसा इफ्तार और सेहरी के समय उत्साह नहीं रहता है। अल्लाह तआला हम सभी को कोरोना वायरस से सुरक्षित रखें। 7 वर्षीय पुत्र मोहसिन शब्बीर उर्फ नूर बाबू इस वर्ष से रोजा है। नूर बाबू को इफ्तार के समय परिवार के सभी सदस्यों के साथ इफ्तार करना अच्छा लगता है। नूर आसानी से रोजा रख ले रहे हैं। इफ्तार के समय नूर दुआ मांगते हैं। उनका कहना है उस समय की दुआ कबूल होती है

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जिस दिन डीएम बनेगा वासिफुल्लाह तो माहामारी में लोगों की पूरी मदद करेगा

आजाद चौक मेहसौल के वासिफुल्लाह खान व राफिया खानम ने अल्लाह के मोहब्बत में अपनी जिदगी का पहला रो•ा रखा। दोनों मोहिबुल्लाह खान के पुत्र एवं पुत्री और मुफ्ती आजम बिहार मुफ्ती मोहम्मद सनाउल्लाह खान के पौत्र- पौत्री हैं। दादा मुफ्ती आजम बिहार से अल्लाह रसूल की बातें सुनते हैं, जिसका असर दोनों पर है। मोहम्मद वासिफुल्लाह खान ने बताया थोड़ी भी परेशानी नहीं। मैं कल भी रोजा रखूंगा। इससे अल्लाह खुश होता है और अल्लाह को खुश करने से मैं डीएम बन जाऊंगा। इफ्तार के वक्त दुआ करूंगा की या अल्लाह दुनिया से करोना खत्म कर दे। इन दोनों की मां शादान खानम इन्हें दिनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम देती हैं। बच्चे से डीएम की बात सुनकर उनके पिता से पूछा कि उसके जेहन में डीएम बनने की बात कैसे आई तो उन्होंने जवाब दिया जब यह बहुत छोटा था तब मड़पा में राजीव रौशन जिलाधिकारी आए थे। तब से इसके दिमाग में आ गया कि वह डीएम ही बनेगा।

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