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परदेश से ट्रेन व बस से लौट रहे हैं लोग, जांच की बात तो दूर, थर्मल स्क्रीनिंग की भी व्यवस्था नहीं है

कोराेना संक्रमितों की संख्या जिले में दिनों दिन तेज रफ्तार में बढ़ रही है। प्रतिदिन आ रही रिपोर्ट से इसके संक्रमण में दो से तीन गुणा बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। प्रशासन भी चौक-चौराहों के साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर डंडा घुमाती नजर आ रही है। इधर, अन्य अत्यधिक प्रभावित राज्य से पहुंच रहे लोगों की जांच में उदासीनता कायम है।

न तो रेलवे स्टेशन पर ही जांच हो रही है7 और नहीं दूसरे प्रदेशों से सीधे पहुंचे वालों एवं पटना और मुजफ्फरपुर स्टेशन से उतर कर बसों से पहुंचने वाले लोगों की जांच पर ही ध्यान दिया जा रहा है। इन स्थानों पर न तो कोई सुरक्षा गार्ड है और न ही स्वास्थ्य टीम का कोई प्रतिनिधि प्रतिनियुक्त नजर आए।
अन्य प्रदेशों से पहुंचती है बसें
शहर के बाहर फोर लाइन के कांटा चौक, बरियारपुर के साथ ही बाईपास बस स्टैंड व पुरानी बस स्टैंड में दूसरे प्रदेशों के लिए बसें संचालित है। बरियारपुर, कांटा चौक व बाइपास बस स्टैंड पर जहां दिल्ली के साथ ही पंजाब, हरियाणा व राजस्थान से बसे पहुंच रही है। वहीं पुरानी बस स्टैंड पर प्रतिदिन सिलीगुड़ी से बसों में यात्री पहुंच रहे हैं।

कांटा चौक पर दिल्ली से पहुंचे संजीव कुमार ने बताया कि दिल्ली की स्थिति भी गंभीर हो रही है। वे काम छोड़कर घर वापस आ गए हैं। रामबहादूर ने बताया कि वे सपरिवार आये हैं, आगे की स्थिति कुछ अच्छी नहीं दिख रही थी।

उनकी दिल्ली से सीतामढ़ी तक कहीं भी कोई स्क्रीनिंग या जांच नहीं हुई है। बस कर्मी तेजनारायण मिश्र, भूषण शर्मा व पच्चू सिंह ने बताया कि वे लोगों को मास्क पहनने की हिदायत देते हैं, लेकिन यहां न तो कोई पुलिस वाले ही आए हैं और नहीं मेडिकल टीम ही पहुंची है।
जंक्शन पर भी नहीं है सुविधा
रेल से आने वालों यात्रियों की जंक्शन पर केवल थर्मल जांच की जा रही है। मेडिकल टीम केवल सुबह आठ बजे से पांच बजे तक पहुंचने वाली ट्रेन के कुछ यात्रियों का ही स्क्रीनिंग कर पा रहे हैं। स्टेशन के प्लेटफार्म से बाहर निकलने के लिए दो गेट हैं, लेकिन टीम केवल मुख्य गेट पर ही स्क्रीनिंग करती देखी जाती है। वहीं दूसरे गेट से यात्री बेरोक टोक बाहर निकल कर चले जाते हैं।

बरियारपुर, कांटा चौक, बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन पर ही प्राय: अन्य राज्यों से लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन इन स्थानों प्रशासनिक अधिकारी व पुलिस के जवान भी नजर नहीं आए। वहीं जांच काे लेकर मेडिकल टीम की कोई व्यवस्था भी नहीं थी।

वाहनों में 50 प्रतिशत क्षमता उपयोग का पालन नहीं: प्रशासन द्वारा हालांकि बसों व ऑटो को केवल 50 प्रतिशत क्षमता में ही यात्री बैठाने का निर्देश दिया गया है। लेकिन, बस व ऑटो में भी निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। बसों की सेनिटाइजिंग तो दूर कर्मी एवं यात्री भी बिना मास्क के ही नजर आते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन भी नदारद है।

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