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बिहार: फिजिक्स के टीचर ने बनाई इलेक्ट्रिक साइकिल, खूबियां जानकर हो जाएंगे हैरान

पटना. लॉकडाउन के दौरान जब लोग घरों में कैद होकर समय काट रहे थे उसी दौरान पटना ( Patna) के एक शख्स ने ऐसी साइकल तैयार की जो ना सिर्फ पैसे की बचत करेगी बल्कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाएगी. यह इलेक्ट्रिक साइकिल (Electric Bicycles) खास इसलिए भी है, क्योंकि एक बार इसे चार्ज करेंगे तो आप 80 किमी तक सफर तय कर सकेंगे. इस साइकिल में 0.750 किलोवॉट की लेड एसिड बैटरी का प्रयोग किया गया है. साथ में एक पॉवरफुल मोटर भी लगी है. जिसकी बदौलत यह साइकिल चाभी घुमाते ही सडक़ पर दौडऩे लगती है. साइकिल में बाइक की तरह क्लच, स्कलेटर, हॉर्न और हेडलाइट भी लगे हुए हैं. यही नहीं मनोरंजन के लिए एक छोटा सा साउंड सिस्टम भी लगाया गया है. साइकिल की रफ्तार 25 किमी प्रतिघंटे तक सीमित की गई है.

प्रो अजीत कुमार वैसे तो पेशे से भौतिकी के टीचर हैं, जो पिछले 15 सालों से अपने कोचिंग संस्थान में बच्चों को फिजिक्स पढ़ाते हैं, लेकिन कोरोना काल में कोचिंग बंद होने के बाद अजीत कुमार खाली हो गए थे. उन्होंने खाली समय में इस अनोखी साइकिल का अविष्कार किया. इस साईकिल का निर्माण करने में तकरीबन 6 महीने का समय लगा, जबकि एक साइकिल बनाने में तकरीबन 23 से 24 हजार का खर्च आया है. अजीत कुमार का कहना है कि तत्काल उन्होंने उद्योग आधार एप के जरिये अपना रजिस्ट्रेशन तो करा दिया है, लेकिन सरकार से उन्हें आर्थिक मदद की उम्मीद है. उनका कहना है कि बिहार मेड इलेक्ट्रिक साइकिल को प्रमोट भी करें ताकि ना सिर्फ उन्हें आर्थिक सहायता मिले बल्कि बिहार की प्रतिभा को गौरव भी मिलेगा.

उनका मानना है कि अगर ऐसे इलेक्ट्रिक साइकिल को सरकार बढ़ावा देगी तो बिहार में नए रोजगार का सृजन भी होगा. अजित कुमार का दावा है कि बिहार से बाहर जो लोग इलेक्ट्रिक साइकिल बाजार में उतारते हैं उससे बेहतर क्वालिटी, ज्यादा सहूलियत और बहुत कम रेंज में वो इलेक्ट्रिक साइकिल को बाजार में उतार देंगे. इस साइकिल की कीमत इन्होंने 27 हजार तय की है. इनका मानना है कि अगर सरकार इसपर ध्यान दे तो बिहार में इस इलेक्ट्रिक साईकिल का उद्योग भी लगाया जा सकता है.  जिससे हजारों बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता है. अजित कुमार के छोटे से कारखाने में जो लोग मजदूरी कर रहे हैं ये पहले दिल्ली में ही काम करते थे. पिछले लाकडाउन में जब बिहार लौटे उसके बाद दिल्ली ना जाकर वो अपने प्रदेश में काम कर रहे हैं.

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