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रेलवे को ट्रेवल टाइम कम करने की नई तकनीक से हुआ बड़ा फायदा, जानिए किन ट्रेनों की स्पीड बढ़ेगी

नई दिल्ली. भारतीय रेलवे (Indian Railways) को ट्रेवल टाइम कम करने वाली पुश-पुल टेक्नोलॉजी तकनीक (push-pull technology) से बड़ा फायदा हुआ है. राजधानी एक्सप्रेस (Rajdhani Express) में इस्तेमाल की गई तकनीक की वजह से ट्रेवल टाइम 90 मिनट तक कम हो गया है. अब रेलवे इस तकनीक को दूसरी ट्रेनों में भी इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है.
Indian Railways ने हाल ही में पुश-पुल टेक्नोलॉजी पर चलने वाली पहली राजधानी एक्सप्रेस मुंबई से नई दिल्ली के लिए शुरू की थी. इसके जरिए यात्रा समय में 90 मिनट तक का अंतर देखने को मिला है. लिहाजा, अब रेलवे ने 12 ऐसी Rajdhani Express ट्रेनें तैयार की हैं, जो यात्रियों को बेहद कम समय में नई दिल्ली से मुंबई और कोलकाता पहुंचा देंगी. न्यूज 18 से बातचीत में एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन रूट्स पर यात्री अब पहले के मुकाबले 60 से 90 मिनट जल्दी सफर तय कर लेंगे. आने वाले दिनों में सभी राजधानी ट्रेनों को ‘पुश-पुल मोड’ से लैस करने की योजना है. वहीं, एक अधिकारी ने कहा कि आने वाले समय में शताब्दी में भी पुश-पुल मोड का इस्तेमाल किया जाएगा.

क्या है पुश-पुल तकनीक
पुश-पुल मोड में एक इंजन आगे और एक इंजन पीछे होता है. अक्सर पहाड़ी रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के आगे और सबसे आखिरी में, दोनों तरफ इंजन लगे देखे होंगे. वैसे ही अब सामान्य ट्रेनों में भी इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाने लगा है. ऐसे में एक इंजन जहां ट्रेन को आगे की ओर खींचेगा वहीं दूसरा इंजन ट्रेन को पीछे से ढकेलेगा. अभी फ्रांस के फेमेस टीजीवी सिस्टम, यूरो स्टार, अमेरिका की एसेला ट्रेन और पश्चिम की कई रेल प्रणालियों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है.

यह होगा फायदा
राजधानी ट्रेनों में पुश- पुल तकनीक से ट्रेन की स्पीड बढ़ जाएगी और यह अपने गंतव्य स्टेशन तक जल्दी पहुंचेगी. इससे ट्रेन संचालन की सुरक्षा बढ़ेगी, यात्रा के समय में कमी आएगी, आरामदायक सवारी (जर्क मुक्त) होगी और इसकी लागत भी कम होगी. यही वजह है कि राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन अब आने वाले दिनों में अपना पूरा सफर 160 किलोमीटर की रफ्तार से पूरा करेगी. रेलगाड़ियों को मौजूदा रोलिंग स्टॉक (इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव और एलएचबी कोच) के साथ चलाया जा सकता है. इसके अलावा यह शोर और प्रदूषण फैलाने वाली पावर कारों को भी हटा सकता है, जिससे कीमती डीजल की बचत होगी.
 

पहली बार 2016 में हुआ था ट्रायल 
सबसे पहले रेलवे ने साल 2016 में जयपुर से जोधपुर तक पुश-पुल लोकोमोटिव का ट्रायल किया था. साल 2018 में यह सामने आया था कि अगर इस तकनीक का इस्तेमाल राजधानी के अलावा दूरंतो, एसी एक्सप्रेस और गरीब रथ में भी इस्तेमाल किया जाता है तो फिर रेलवे को सालाना छह करोड़ रुपये की बचत होगी. पूरी ट्रेन के एसी और बिजली के अन्य उपकरणों को इन दो इंजन से खपत पूरी हो जाएगी.

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