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मुजफ्फरपुर में हर घर नल जल निधि का 32 लाख मुखिया ने अपने बेटे के खाते में भेजा

मुजफ्फरपुर: बिहार सरकार की घर-घर नल जल योजना मुजफ्फरपुर में भ्र’ष्ट्राचार के भेंट चढ़ गया, यही नहीं जिन अधिकारियों को इसकी मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने भी आंखें बंद करे रखी. पुरा मामला मुशहरी के बड़ा जगन्नाथ पंचायत का है. यहां के तीन वार्डों संख्या 4,10 और 12 की हर घर नल-जल योजना के लगभग 32 लाख रुपये पंचायत की मुखिया मंजू देवी के पुत्र आदित्य कुमार के खाते में भेज दिया गया. जबकि इस काम के लिए उसकी एजेंसी पंजीकृत ही नहीं थी. प्रखंड स्तर तक मामले की शि’कायत में बीडीओ को इसमें कुछ भी गड़बड़ी नजर नहीं आई और शि’कायत मिलने पर उन्होंने कोई का’र्रवाई नहीं की.

लेकिन अनुमडलीय लोक शि’कायत निवारण अधिकार अधिनियम पूर्वी में मामला आने के बाद मुखिया, पंचायत सचिव, तीनों वार्ड के वार्ड सदस्य एवं वार्ड सचिव को सरकारी राशि के दु’रुपयोग करने का दो’षी करार दिया गया. जिसके बाद दोषपत्र में लोक प्राधिकार को 15 दिनों में कार्रवाई का निर्देश दिया गया. जिला पंचायती राज पदाधिकारी को भी मामले में संज्ञान लेते हुए अपने स्तर से सभी दोषि’यों के खि’लाफ का’र्रवाई करने का आग्रह किया गया है. लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी लोक प्राधिकार की ओर से का’र्रवाई नहीं की गई. वहीं मामले में डीडीसी मुजफ्फरपुर डॉ. सुनील कुमार झा ने कहा कि मामला गं’भीर है. सरकारी योजना की इतनी बड़ी राशि किसी निजी खाते में नहीं दी जानी चाहिए. इसमें दो’षियों के खि’लाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी. इसके अलावा लाप’रवाही के दो’षियों पर भी का’र्रवाई होगी.

इस मामले में मीनापुर के अमरेंद्र कुमार ने शि’कायत दर्ज कराई थी. मामले की रिपोर्ट में कहा गया कि मुखिया द्वारा पुत्र के नाम से चेक काटा गया. मगर ध्यान दिलाए जाने पर तत्काल चेक वापस लेकर एजेंसी को दी गई. मुखिया ने बताया कि भूलवश चेक पुत्र को एजेंसी का लाभ दे दिया. जबकि वह पंजीकृत नहीं था. प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी से परिवाद की जांच कराने में यह बात सामने आई कि योजना में प्राक्कलन के अनुसार वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति को राशि हस्तांतरित करनी है.

मगर नियम का उल्लंघन करते हुए वार्ड सदस्य और वार्ड सचिव ने मुखिया के पुत्र आदित्य कुमार के खाते में बड़ी सरकारी राशि हस्तांतरित कर दी. इसके लिए अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी पूर्वी ने दोनों को दोषी माना. इस मामले में शि’कायत के बाद 15 फरवरी 2019 को राशि भेजने और छह माह बाद दो अगस्त को राशि वापस लेने को गबन से मंशा का शक हुआ. आदेश में कहा गया कि जब मुखिया पुत्र की एजेंसी पंजीकृत नहीं थी तो इतनी बड़ी राशि देने के पीछे गबन की मंशा थी. इसे देखते हुए पंचायत की मुखिया, पंचायत सचिव, मुखिया पुत्र, वार्ड सदस्य एवं वार्ड सचिव के खि’लाफ कार्र’वाई की जाए.

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