भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत ने शनिवार को कहा कि अगर सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को 2 अक्टूबर तक वापस नहीं लिया, तो आगे की रणनीति पर काम करना शुरू कर देंगे. उन्होंने कहा, “कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए हमने सरकार को 2 अक्टूबर तक का समय दिया है. इसके बाद हम आगे की योजना बनाएंगे। हम दबाव में सरकार से कोई बातचीत नहीं करेंगे.” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार कृषि क़ानूनों को वापस ले और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क़ानून बनाए नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा. हम पूरे देश में यात्राएं करेंगे और पूरे देश में आंदोलन होगा.
गौरतलब है कि तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग के साथ पंजाब, हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसान दो महीनों से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.
क्या है मामला
कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर सरकार ने सितंबर में तीनों कृषि कानूनों को लागू किया था. सरकार ने कहा था कि इन कानूनों के बाद बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसानों को देश में कहीं पर भी अपने उत्पाद को बेचने की अनुमति होगी. वहीं, किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. प्रदर्शन कर रहे किसानों का दावा है कि ये कानून उद्योग जगत को फायदा पहुंचाने के लिए लाए गए हैं और इनसे मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी.






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