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मुजफ्फरपुर : एसकेएमसीएच में कैं’सर अस्पताल में कीमोथेरेपी सेवा शुरू

मुजफ्फरपुर : जिलावासियों के लिए स्वास्थ्य सेवा में शनिवार का दिन अहम रहा। एसकेएमसीएच में होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की ओर से पहली बार कीमोथेरेपी की सेवा का शुरू की गई। इसका शुभारंभ टाटा मेमोरियल अस्पताल के उप निदेशक डॉ.पंकज चतुर्वेदी ने किया। रिसर्च सेंटर के नोडल पदाधिकारी डॉ. रविकात ने बताया कि कीमोथेरेपी के बाद मरीजों को निशुल्क दर्द व अन्य आवश्यक दवाएं भी दी जाएंगी। इसकी व्यवस्था की जा रही है। अस्पताल प्रबंधन दवा दुकान खोलने के लिए लाइसेंस लेगा। वहीं दर्द निवारण दवाओं के लिए नारकोटिक्स का लाइसेंस भी लिया जाएगा। चार फरवरी से 50 बेड का अस्पताल शुरू हो जाएगा। इसके लिए एसकेएमसीएच परिसर में मॉड्युलर बनने की तैयारी अंतिम चरण में है। जो मरीज दिल्ली-मुंबई में जाकर निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं, उनको भी यहीं सेवा दी जाएगी। अलग से वीआइपी पेइंग वार्ड होगा। मरीजों से इलाज का न्यूनतम खर्च लिया जाएगा। कितनी राशि इलाज खर्च के लिए लेनी है यह मुख्यालय की ओर से तय की जाएगी। फिलहाल सभी प्रकार का इलाज व दवाएं निशुल्क हैं। ड्रग इंस्पेक्टर विकास शिरोमणि ने कहा कि दवा की कमी नहीं होने दी जाएगी। समय पर सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कैंसर के इलाज को दिल्ली-मुंबई जाने की जरूरत नहीं होगी : सांसद

सांसद अजय निषाद ने सेवा के लिए रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञ चिकित्सकों को बधाई देते हुए कहा कि कैंसर के इलाज के लिए अब दिल्ली, मुंबई जाने की जरूरत नहीं होगी। चार फरवरी से कैंसर मरीजों को भर्ती करना शुरू हो रहा है। उन्होंने एसकेएमसीएच प्राचार्य डॉ.विकास कुमार से कैंसर के इलाज व सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की जानकारी ली।

इनकी रही भागीदारी

एसकेएमसीएच प्राचार्य डॉ.विकास कुमार, उपाधीक्षक डॉ.बीएस झा, न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ.दीपक कर्ण, आइएमए अध्यक्ष डॉ.संजय कुमार, डॉ.कुमार प्रभाष, डॉ.गुंजेश, डॉ.बुढान, डॉ.निशात, डॉ. सरिता, डॉ.चंदा, डॉ.याग्निक, सामुदायिक सर्वे प्रभारी दीपक गुप्ता आदि।

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इनसेट

गुटखा व खैनी खाने से हुआ मुंह का कैंसर, इलाज पर अबतक खर्च हो गए चार लाख

मुजफ्फरपुर : मझौलिया के रहनेवाले 50 वर्षीय कैंसर मरीज की पहले दिन कीमोथेरेपी की गई। इस मौके पर चिकित्सकों व अन्य कर्मियों ने ताली बजाकर उनका स्वागत किया। उप निदेशक ने मरीज की पत्नी से किसी प्रकार की चिंता नहीं करने और अस्पताल की ओर से सभी सहायता करने का भरोसा दिया। मरीज ने अपनी पीड़ा शेयर करते हुए कहा कि कोलकाता, पटना में वे एक साल से इलाज करा रहे थे। गुटखा व खैनी खाने से मुंह का कैंसर हो गया। गरीबी के कारण काफी महंगे इलाज को करा पाने में सक्षम नहीं थे। अबतक करीब चार लाख रुपये खर्च हो गए। स्थानीय स्तर पर कीमोथेरेपी की सुविधा मिलने से अब उनमें बेहतर इलाज की उम्मीद जगी है।

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