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किस तरह China भारत के साथ जल-युद्ध की फिराक में है?

भारत से सीमा विवाद के बीच चीन ने अब मौसम युद्ध की ठान ली है. वो इंटरनेशनल जल संधि की अनदेखी करते हुए भारत की ओर बहने वाली नदियों पर कई बड़े बांध बनाने की तैयारी में है. इन्हीं में से एक है यारलुंग जांगबो नदी. एशिया टाइम्स में इस बारे में विस्तार से बताया गया है कि कैसे चीन इस नदी पर सबसे बड़ा बांध बनाने की योजना बना रहा है. कहा जा रहा है कि ये बांध दुनिया के सबसे बड़े बांध, थ्री जॉर्जेस बांध, जो कि चीन में ही है, से ज्यादा पनबिजली पैदा कर सकेगा.

तो चीन के अपने यहां बांध बनाने से हमारा क्या नुकसान?

समस्या ये है कि चीन की यही नदी हमारे यहां आने पर ब्रह्मपुत्र हो जाती है. चीन पहले से ही इस नदी पर कई छोटे-मोटे बांध तैयार कर चुका है लेकिन अब विशाल बांध बनाने पर भारत के कई हिस्से बुरी तरह से सूखे की चपेट में आ जाएंगे. मुश्किल ये है कि जिनपिंग सरकार ने अब तक भारत या फिर बांग्लादेश से भी इस बांध के संबंध में बात नहीं की है, जबकि बांध की योजना और तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.

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साफ है कि चीन जलसंधि तोड़ने की फिराक में है (Photo-news18 via Getty images)

साफ है कि चीन जलसंधि तोड़ने की फिराक में है

nullबता दें कि दो या कई देशों के बीच बहने वाली नदियों के पानी को लेकर एक ग्लोबल संधि हुई थी. साल 1966 के अगस्त में इसके लिए हेलसिंकी (फिनलैंड) में समझौता हुआ. ये एक तरह की गाइडलाइन है, जो तय करती है कि पानी का बंटवारा कैसे हो या फिर बांध बनाए जाएं या नहीं. इसे हेलसिंकी गाइडलाइन कहते हैं. इसी के आधार पर सारे इंटरनेशनल जल विवाद निपटाए जाते हैं. चीन ने साफ तौर पर इसकी अवहेलना की. इसके अलावा कई और संधियां बनीं, जो पानी के बंटवारे पर बात करती हैं.

विज्ञापनnullक्या है जल युद्ध 
चीन ने इन तमाम गाइडलाइन को अनदेखा करते हुए बांध बनाने की योजना बनाई. इससे दोनों देशों के बीच पहले से बढ़ा हुआ तनाव गहरा सकता है. वैसे नदियों को लेकर देशों के बीच तनाव कोई नई बात नहीं. पहले भी कई बार ऐसी लड़ाइयां हो चुकी हैं, जिसके मूल में कोई नदी रही. इस तरह के युद्ध को जल युद्ध या वॉटर वॉर कहते हैं.

इतिहास में मिलता है जिक्र
माना जाता है कि पहला जल युद्ध आज से 4,500 साल पहले आधुनिक ईराक में हुआ था. ये युद्ध तिगरिक और यूफरेट्स नदियों को लेकर हुआ था. युद्ध में दो प्राचीन शहर लगाश और उम्मा शामिल थे. हुआ ये कि लगाश के राजा ने नदियों पर बांध बना दिए, जिससे उम्मा शहर में सूखे के हालात बन गए. इसी बात को लेकर दोनों में लड़ाई हुई और कथित तौर पर बांध को तोड़ दिया गया था. हालांकि इस प्राचीन लड़ाई के बारे में और जानकारी नहीं मिलती है.

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चीन ने तमाम गाइडलाइन को अनदेखा करते हुए बांध बनाने की योजना बनाई (Photo- news18)

तीसरे विश्व युद्ध के कयास
पानी को लेकर दुनियाभर में जितनी भी लड़ाइयां हुईं, उसकी लिस्ट तैयार की जा चुकी है. वॉटर कनफ्लिक्ट क्रोनोलॉजी लिस्ट नाम से ये सूची पेसिफिक इंस्टीट्यूट ने बनाई है, जहां सिलसिलेवार जानकारी मिलती है कि कब, कहां, किनके बीच पानी को लेकर लड़ाई हुई. पानी को लेकर दुनिया में इतनी हलचल मची और अब हालात ये हैं कि कई बार विशेषज्ञ ये बोलते परहेज नहीं करते कि अगला विश्व युद्ध पानी को लेकर हो सकता है. फिलहाल चीन जैसे हालात पैदा कर रहा है, उसमें ये भविष्यवाणियां किसी हद तक सही भी लगती हैं.

चीन ने दूसरे पड़ोसियों से भी संबंध बिगाड़े
केवल भारत और बांग्लादेश से ही नहीं, चीन ने साझा नदियों पर बांध बनाकर म्यांमार, लाओस, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम जैसे पड़ोसियों से भी संबंध खराब किए हैं. ये सारे देश उसके साथ मेकॉन्ग नदी साझा करते थे लेकिन चीन ने बगैर पूर्व सूचना और सहमति के सीधे जलसंधि को दरकिनार करते हुए नदी पर 11 मेगा डैम बना डाले.

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जल की तरह चीन भारत से मौसम युद्ध की भी शुरुआत कर रहा है- सांकेतिक फोटो

चीन मौसम युद्ध की भी शुरुआत कर सकता है
अनुमान है कि चीन जल्द ही वेदर मॉडिफिकेशन सिस्टम लॉन्च कर सकता है ताकि मौसम पर भी काबू पा सके. चीन ने इस प्रोग्राम का दायरा 50.5 लाख वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना बनाई है. यह भारत के क्षेत्रफल से तकरीबन डेढ़ गुना ज्यादा है. चीन की स्टेट काउंसिल के मुताबिक, वो तकनीक के जरिए बर्फबारी और बारिश जैसे मौसमी बदलावों पर काबू कर सकेगा. खबर है कि इस तकनीक को बनाने की वो लंबे समय से कोशिश कर रहा था और केवल साल 2012 से 2017 के बीच इस पर करीब 9889 करोड़ रुपये लगाए गए हैं.

पहले कुछ और तर्क दिया था
चीन ने जब ये वेदर मॉडिफिकेशन सिस्टम पर काम शुरू किया तो उसने अलग ही तर्क दिए थे. उसने बताया था कि इसकी मदद से वो सूखाग्रस्त या बाढ़-प्रभावित इलाकों का मौसम अनुकूल बना देगा ताकि फसलें, लोग और पशु बचे रहें. लेकिन अब भारत-चीन तनाव के बीच हो सकता है कि चीन मौसम बदलने की इस तकनीक का उल्टा- पुल्टा इस्तेमाल करने लगे. मिसाल के तौर पर अगर चीन अपने यहां घनघोर बारिश रोकने के लिए मौसम से छेड़छाड़ कर उसे कम करने की कोशिश करे और इसका असर भारत के उन इलाकों तक चला जाए, जहां पहले से ही कम बारिश होती है तो यहां सूखा पड़ सकता है.

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