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किसानों के लिए राहुल गांधी आज सड़क पर उतरेंगे, कांग्रेस नेताओं का राष्ट्रपति भवन तक मार्च

नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में किसानों का आंदोलन जारी है. इस बीच आज कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) किसानों के पक्ष में 10.45 बजे विजय चौक से लेकर राष्ट्रपति भवन तक मार्च करेंगे. राहुल गांधी के नेतृत्व में अन्य कांग्रेसी सांसद भी इसमें हिस्सा लेंगे. मार्चके बाद राहुल और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) से मुलाकात करेंगे और उन्हें 2 करोड़ हस्ताक्षर वाला ज्ञापन सौपेंगे. इसमें केंद्रीय कृषि कानूनों  (Farm Laws) को निरस्त करने का आग्रह किया जाएगा.

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बयान में यह आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पहले ‘कृषि विरोधी कानून’ बनाकर किसानों को दर्द दिया और अब उसके मंत्री अन्नदाताओं का अपमान कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘कृषि विरोधी कानूनों को लेकर चल रहे सतत विरोध (Kisan Andolan) को आगे बढ़ाने और मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने कानूनों के खि’लाफ राष्ट्रव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू किया था. इन कानूनों को वापस लेने की मांग के पक्ष में करीब दो करोड़ लोगों के हस्ताक्षर एकत्र किए गए हैं.’

अब तक 44 किसानों की जान जा चुकी- कांग्रेस
कांग्रेस नेता ने दावा किया, ‘भीषण सर्दी के बीच किसान 27 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. अब तक 44 किसानों की जान जा चुकी है. अहंकारी मोदी सरकार ने पहले किसानों को दर्द दिया और अब उसके मंत्री किसानों का अपमान भी कर रहे हैं.’

किसान संघों ने सरकार से कहा ‘खुले दिल’ से वार्ता के लिये आगे आएं
प्रदर्शनकारी किसान संघों ने गेंद सरकार के पाले में होने की जिक्र करते हुए बुधवार को उससे कहा कि वह बातचीत फिर से शुरू करने के लिये नया ठोस प्रस्ताव लेकर आए, वहीं कृषि मंत्री ने कहा कि समाधान तक पहुंचने का संवाद ही एक मात्र रास्ता है और सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिये प्रतिबद्ध है.


तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त किये जाने की मांग को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध खत्म होने की कोई संभावना नजर नहीं आने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को छह राज्यों के किसानों के साथ बातचीत करेंगे और इस दौरान किसान केंद्र द्वारा की गई विभिन्न पहलों को लेकर अपने अनुभव साझा करेंगे.

कृषि कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव को खारिज कर चुके किसान नेताओं ने कहा कि उन्हें केंद्र के ‘खुले दिल’ से वार्ता के लिये आगे आने का इंतजार है और ‘अगर सरकार एक कदम आगे बढ़ाएगी तो किसान दो कदम बढ़ेंगे.’

बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती और ‘किसान दिवस’ था तथा कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना जैसे विपक्षी दलों और वाम दलों ने इस मौके पर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार की रुचि सिर्फ कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने में है जबकि किसान सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिये मजबूर हैं.

इस पर पलटवार करते हुए भाजपा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों द्वारा किसानों को गुमराह किया जा रहा है और भड़काया जा रहा है जबकि सत्ता में रहते हुए उन दलों ने उनका शोषण किया. सरकार ने किसानों के कल्याण के लिये अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और उम्मीद व्यक्त की कि किसान संघ अपना प्रदर्शन वापस ले लेंगे.

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