पटना. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए नये कृषि कानून (Farmers Bill) के विरोध में कई किसान संगठनों के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग भी सड़कों पर उतरे. बिहार में तो निर्धारित समय 11 बजे से पहले कई स्थानों पर सुबह छह बजे से ही विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया था. सड़क जाम करने से लेकर रेल रोको अभियान तक चलाया गया. महागठबंधन (Maha gathbandhan) में शामिल भाकपा माले, सीपीआई, सीपीएम के अलावा कई जगहों पर कांग्रेस के कार्यकर्ता भी विरोध करते नजर आए. यहां तक की जन अधिकार पार्टी के वर्कर भी काफी संख्या में प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया. राजद के कार्यकर्ता (RJD workers) भी विभिन्न जिलों में भारत बंद को सफल करने के लिए सड़कों पर उतरे, पर वे नजर नहीं आए जिनको सभी की नजरें तलाश कर रही थीं.
दरअसल हैरत की बात यह रही कि बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भारत बंद में कहीं भी नहीं दिखे जबकि दो दिन पहले उन्होंने कहा था कि किसानों के लिए अगर सरकार मुझे फांसी पर लटका देगी तो मंजूर होगा. भारत बंद से गायब रहने पर अब जेडीयू ने तेजस्वी पर करारा हमला बोला है. जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि राजनीति के बहरूपिया तेजस्वी यादव ने एक बार फिर अपना रंग दिखाया है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने संकल्प लिया. मचिया पर बैठकर अपने बुजुर्ग नेता को अपमानित किया और आंदोलन के दिन फरार हो गया.
नीरज रुमार ने कविताई अंदाज में भी कटाक्ष किया और कहा, लालू के दागी लाल ने कर दिया कमाल, छोड़ा मैदान और हो गए अंतर्धान. हम करेंगे मस्ती, तुम करो ड्यूटी. जनता से हमें क्या लेना देना हम तो चलेंगे सिर्फ भ्रष्टाचार, परिवारवाद और वंशवाद की राजनीतिक चाल.
गौरतलब है कि एक दिन पहले की तेजस्वी ने ट्वीट कर कहा था, ‘किसान के बच्चे ही सीमा पर देश की रक्षा करते हैं और किसान के अन्न से ही देश का पेट भरता है. अगर किसान के बेटे जवान और किसान स्वयं झुक गए तो देश झुक जाएगा. हम हर संघर्ष में दृढ़ता के साथ अन्नदाताओं संग कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं. धनदाताओं के पिछलग्गुओं बिना अन्न क्या धन खाओगे?
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया था कि वह 8 दिसंबर को भारत बंद के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरें और किसान विरोधी कानून का विरोध करें. आरजेडी सूत्रों का कहना है कि मंगलवार को राजद कार्यकर्ता शहर से लेकर गांव तक शांतिपूर्ण तरीके से मार्च करेंगे. बहरहाल आठ दिसंबर का पूरा दिन बीत गया, लेकिन तेजस्वी यादव कहीं नजर नहीं आए. ऐसे में हर कोई यही पूछ रहा है कि तेजस्वी आखिर फिर कहां गायब हो गए?






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