बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पटना, गया एवं मुजफ्फरपुर में सर्वाधिक प्रदूषण फैलाने वाले 22 उद्योगों की स्थापना पर रोक लगा दी है। पर्षद की ओर से इन शहरों में अब नए उद्योगों की स्थापना की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह आदेश राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने जारी किया है।
पुराने उद्योगों का नवीकरण कराना भी हुआ मुश्किल
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने तीनों शहरों के मास्टर प्लान सीमांकन क्षेत्र एवं योजना क्षेत्र में 22 उद्योगों को लगाने पर रोक लगा दी है। पुराने उद्योगों को नवीकरण के लिए भी कठोर नियम बनाए गए हैं। जरूरत पडऩे पर बोर्ड कंपनियों के स्थान परिवर्तन का आदेश दे सकता है।
बढ़ते प्रदूषण पर रोक लगाने का दिया हवाला
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार घोष का कहना है कि राज्य में बढ़ते प्रदूषण की मात्रा पर रोक लगाना बहुत जरूरी है। अगर प्रदूषण पर रोक नहीं लगाया गया तो मानव जीवन के लिए खतरा पैदा हो सकता है। राजधानी समेत कई शहरों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है।
पटना में मानक से पांच गुना अधिक वायु प्रदूषण
राजधानी में मानक से पांच गुणा ज्यादा धूलकण की मात्रा है। इस तरह की स्थित श्वांस के मरीजों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर बोर्ड ने 22 उद्योग के नए यूनिट स्थापित करने पर रोक लगा दी है। जो उद्योग पहले से ही काम कर रहे हैं, उनका नवीकरण कठोर नियमों के साथ होगा ताकि प्रदूषण पर सख्ती से लगाम लगाई जा सके।
जागरूकता अभियान चलाया जाएगा
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के तत्वावधान में जल्द ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसमें अधिक से अधिक लोगों को शामिल करने की कोशिश की जाएगी।
रोक लगाए जाने वाले प्रमुख उद्योग
प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने नए थर्मल पावर प्लांट, सीमेंट फैक्ट्री, सीमेंट ग्राइडिंग, स्टोन क्रशर, लाइम मैन्युफैक्चरिंग, बोन मिल, आयल रीफाइनरी, रबर, टायर एवं ट्यूब फैक्ट्री, स्लटर हाउस, अबेस्टस उद्योग, कोयला आधारित उद्योग, शीशा एसिड बैट्री रिसाइक्लिंग सहित कई उद्योगों के स्थापना पर रोक लगा दी गई है।




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