Breaking NewsMAHARASHTRA

अर्नब गोस्वामी के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह निजी स्वतंत्रता का मामला, तानों को अनदेखा करे उद्धव सरकार

नई दिल्ली. रिपब्लिक टीवी के मालिक और पत्रकार अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) की जमानत याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. यह मामला जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की कोर्ट में सुना गया. इस दौरान अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र से पूछा क्या अर्नब गोस्वामी के मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जरूरत है, कहा, ‘हम व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दे से निपट रहे हैं’.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी की निजी स्वतंत्रता का हनन हुआ तो वह न्याय पर आघात होगा. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हमारा लोकतंत्र असाधारण रूप से लचीला है, महाराष्ट्र सरकार को इन सब (टीवी पर अर्नब के तानों) को अनदेखा करना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर संवैधानिक अदालत हस्तेक्षप नहीं करती तो, ‘हम निश्चित रूप से विनाश की राह पर चल रहे हैं’. कोर्ट ने कहा  कि – ‘अगर राज्य सरकार किसी व्यक्ति को निशाना बनाती है तो उसे पता होना चाहिए कि नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए शीर्ष अदालत है.’

वहीं सुप्रीम कोर्ट में अर्णब गोस्वामी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की.  बता दें महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के अलीबाग थाने की पुलिस ने चार नवंबर को, इंटीरियर डिजायनर की कंपनी की बकाया राशि का कथित रूप से भुगतान नहीं करने के कारण अन्वय और उनकी मां को कथित रूप से आत्महत्या के लिये बाध्य करने के मामले में अर्नब को गिरफ्तार किया था.

मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किए गए थे अर्नब

हाईकोर्ट का अंतरिम राहत के मामले में फैसला आने से पहले ही अर्ण ने नियमित जमानत के लिये अलीबाग की सत्र अदालत में आवेदन दायर कर दिया था.

हाईकोर्ट ने गोस्वामी और दो अन्य आरोपियों फिरोज शेख और नितीश सारदा की अंतरिम जमानत के आवेदन अस्वीकार करते हुये कहा था कि यह असाधारण अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल का कोई मामला नहीं बनता है. यह प्राथमिकी निरस्त करने के लिये दायर याचिका पर हाईकोर्ट 10 दिसंबर को सुनवाई करेगा.

अर्नब का दावा- ‘मुझे पी’टा गया’

गोस्वामी सहित तीनों आ’रोपियों को चार नवंबर को देर रात एक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था जिन्होंने उन्हें पुलिस हिरासत में देने से इंकार करते हुये 18 नवंबर तक के लिये न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. गोस्वामी को शुरू में अलीबाग जेल के लिये बनाये गये कोविड-19 पृथकवास में रखा गया था लेकिन उनके कथित रूप से मोबाइल इस्तेमाल करते पाये जाने के कारण रायगढ़ की तलोजा जेल शिफ्ट कर दिया गया.

Loading video

इस बीच, रिपब्लिक टीवी के कंसल्टिंग संपादक प्रदीप भंडारी ने रविवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस ए बोबडे को एक पत्र लिखकर गोस्वामी को तलोजा जेल स्थानांतरित किये जाने और खतरनाक अपराधियों के बीच रखे जाने का संज्ञान लेने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया था. उनका कहना था कि गोस्वामी की जान को खतरा है और उन्हें रविवार की सुबह पीटा गया है. 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.