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खाकी से खादी की ओर : डीआईजी का पद छोड़ राजनीति में कूदे नागेंद्र चौधरी सकरा की गलियों में छान रहे खाक

खाकी छोड़कर खादी की ओर मुखातिब होना आईपीएस ऑफिसरों के लिए कोई नई बात नहीं है। डीजीपी पद से गुप्तेश्वर पांडेय के इस्तीफा देकर राजनीति में उतरने से पहले मुजफ्फरपुर के रहने वाले आईपीएस ऑफिसर नागेंद्र चौधरी डीआईजी पद से वीआरएस लेकर अभी सकरा विधानसभा की गलियों की खाक छान रहे हैं।

नागेंद्र के छोटे भाई सुरेश चौधरी सहरसा के वर्तमान में डीआईजी हैं। दो साल पहले नागेंद्र झारखंड के रेल डीआईजी रहते वीआरएस लिया। जिस समय उन्होंने वीआरएस लिया एक साल से ज्यादा नौकरी बची थी। वीआरएस लेने के 6 माह बाद तामझाम के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। मुजफ्फरपुर के सकरा विधानसभा क्षेत्र (अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित क्षेत्र) पर उनकी पहले से ही नजर रही है।

सकरा विधानसभा से भाजपा की टिकट की उम्मीद लिए पूर्व डीआईजी की केमिस्ट्री को कांटी के निर्दलीय विधायक अशोक चौधरी ने गड़बड़ा दिया है। अशोक कांटी छोड़ सकरा की ओर रुख कर चुके हैं। जदयू से अशोक चौधरी सकरा से चुनाव लड़ने का दावा ठोक चुके हैं। इधर, पूर्व डीआईजी नागेंद्र चौधरी का दावा है कि भाजपा सकरा विधानसभा से उन्हें ही उम्मीदवार बनाएगी।

लगातार क्षेत्र में दौरा कर रहे हैं। आज भी तीन पंचायताें का दौरा किया। जदयू के कोटा में सकरा के जाने पर क्या करेंगे? सवाल के जवाब में पूर्व डीआईजी सधे हुए नेता की तरह जवाब देते हैं- लोकतंत्र में जनता मालिक है। निर्दलीय चुनाव लड़ने पर खुलकर बोलने से परहेज करते हुए उनका जवाब है- हम सब कुछ जनता पर छोड़ चुके हैं।

इधर, रिटायर्ड दारोगा भी चुनाव मैदान में

मुजफ्फरपुर में लंबे समय तक डीआईजी कार्यालय में पदस्थापित सब इंस्पेक्टर विनय सिंह सेवानिवृत्ति के साथ चुनावी मैदान में कूद गए हैं। स्पेशल ब्रांच में रहते हुए महज एक माह पहले सेवानिवृत्त हुए विनय मीनापुर विधानसभा का दौरा शुरू कर चुके हैं। उनका कहना है, हमने मीनापुर के कई नक्सलियों को मुख्यधारा में जोड़ा है। कोई पार्टी टिकट नहीं देती है तो निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरेंगे, लेकिप चुनाव जरूर लड़ेंगे।

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