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खुशखबरी: China को छोड़कर भारत आईं Apple की 8 फैक्ट्रियां, सदमे में ड्रैगन

नई दिल्ली: सरहद पर बार-बार नापाक हरकत करने वाले चालबाज चीन की करतूत के खिलाफ पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी है. भारत को अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और आस्ट्रेलिया जैसे देशों का खुला साथ हासिल है. खुशखबरी ये है कि चीन को छोड़कर Apple कंपनी की 8 फैक्ट्रियां अबतक भारत आ चुकी हैं. मतलब साफ है कि भारत मैन्युफैक्चरिंग का हब बन रहा है और यही बात केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कही है.

भारत में लाखों रोजगार के अवसर

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट करके ये लिखा है कि “नरेंद्र मोदी  सरकार द्वारा तेजी से निर्णय लेने से पता चलता है. भारत एक भरोसेमंद इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बना हुआ है. यह लाखों रोजगार पैदा करेगा और सहायक उद्योग को बढ़ावा देगा. Apple के निर्माताओं सहित प्रमुख कंपनियां भारत में स्थानांतरित हो रही हैं.”

उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा और बताया कि “अप्रैल में COVID19 के दौरान उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन की घोषणा की गई, जिसके लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2020 थी. शीर्ष वैश्विक और भारतीय कंपनियों ने 5 वर्षों में components 11 लाख करोड़ के मूल्य के मोबाइल और घटकों को बनाने के लिए प्रतिबद्ध किया और 5 वर्षों में 7 लाख करोड़ रुपये का निर्यात किया.”

साथ ही रविशंकर प्रसाद ने ये भी कहा कि चीन के खिलाफ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साहसिक फैसलों के साथ अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया खड़ा है. केंद्रीय मंत्री ने ये भी बताया कि लद्दाख पर भारत-चीन सीमा तनाव को लेकर इन सभी देशों का खुला साथ मिला.

चीन की चालबाजी है तनाव की वजह

पहले गलवान घाटी और अब पैंगोंग विवाद.. चीन की पैंतरेबाजी थमने का नाम नहीं ले रही हैं. लगातार चीन अपनी तिकड़मबाजी को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है. यही वजह है कि भारत उसे कूटनीतिक तौर पर खोखला करने में जुटा हुआ है. हिन्दुस्तान ने चीन पर एक के बाद एक कई डिजिटल स्ट्राइक की, जो व्यापारिक दृष्टिकोण से चीन के लिए एक बड़े झटके से कम नहीं है. सीमा पर बार बार तनाव की वजह चीन की घुसपैठ नीति है. लेकिन, चीन को ये समझ आने लगा है कि इस बार भारत 1962 वाली भूल नहीं करेगा. हिन्दुस्तान की सेना हर हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.

चीन से भारत का रुख कर रही हैं कंपनियां

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ये भी कहा कि हमारा देश एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के तौर पर उभर रहा है. ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम भी इस बात तो महसूस कर रहा है कि चीन के अलावा भी उनके पास कोई दूसरा विकल्प होना जरूरी है. ऐसे में Apple एक महत्वपूर्ण तरीके से भारत में विकास का प्लान कर रहा है.

रविशंकर प्रसाद ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि साल 2014 में भारत में सिर्फ दो मोबाइल कारखाने थे, लेकिन अब इसकी तादाद 250 से अधिक पहुंच गई है. केंद्रीय मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की मुहिम को लेकर भी इसमें लाभ बताया.

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