2008 के बटला हाउस एन’काउंटर मामले में गिर’फ्तार इंडियन मुजाहिदीन के एक कथित आतंक’वादी ने गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत में कहा कि उसके खिलाफ सबूत “गढ़े गए थे।
करीब एक दशक तक कथित तौर पर फरार रहने के बाद आ’रोपी आरिज खान को फरवरी 2018 में गिरफ्तार किया गया था। बचाव पक्ष के वकील एम.एस. खान ने कहा कि आ’रोपी ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव के समक्ष यह दलील दी।
आ’रोपी ने यह दावा अंतिम दलीलें दिए जाने के दौरान किया। आरो’पी की ओर से पेश वकील खान ने अदालत से कहा कि अभियोजन पक्ष आरिज की दो तस्वीरों पर भरोसा कर रहा है जो कथित तौर पर एक बटुए और उसके शैक्षिक प्रमाण पत्र से बरामद किए गए थे तथा घटना के बाद अ’पराध स्थल पर मिले।
वकील खान ने कहा कि मामले के दो शुरुआती जांच अधिकारियों में से किसी ने भी अपनी रिपोर्ट में इन सबूतों की चर्चा नहीं की। साथ ही, एफआईआर में भी उसका नाम नहीं था। दोनों जांच अधिकारियों ने भी अदालत से कहा कि उन्होंने अपनी जांच के दौरान इनमें से कोई भी सबूत नहीं देखा था। आरिज खान को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था।

जानें क्या है पूरा मामला
13 सितंबर 2008 को दिल्ली के करोल बाग, कनाट प्लेस, इंडिया गेट व ग्रेटर कैलाश में सीरियल बम धमाके हुए थे। इन बम धमाकों में 26 लोग मारे गए थे, जबकि 133 घायल हो गए थे। दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया था कि बम ब्लास्ट को आतंकी गुट इंडियन मुजाहिद्दीन ने अंजाम दिया है। घटना के 6 दिन बाद 19 सितंबर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली थी कि इंडियन मुजाहिद्दीन के पांच आतंकी बटला हाउस स्थित एक मकान में मौजूद हैं।

इसके बाद 19 सितंबर 2008 को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम और जामिया नगर के बटला हाउस के एल-18 मकान में छिपे इंडियन मुजाहिद्दीन के कथित आतंक’वादियों में मुठभेड़ हुई। पुलिस ने दावा किया कि मुठभेड़ में दो आतं:की मारे गए, जबकि दो गिरफ्तार किए गए और एक फरार हो गया था। इन्हें दिल्ली धमाकों के लिए जिम्मेदार बताया गया था।




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