नई दिल्ली. आने वाले दिनों में आपके लिए ट्रेन में सफर करना पहले से भी महंगा होने जा रहा है. यात्रियों को बड़े रेलवे स्टेशनों से ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन यूजर फीस (Station User Fees) पहले की तुलना में ज्यादा चुकानी पड़ेगी. एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से इस बारे में जानकारी दी गई है. रेलवे इस कदम को यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) की तर्ज पर उठा रहा है. यह उन रेलवे स्टेशनों (Railway Station) के लिए होगा, जिन्हें प्राइवेट कंपनियों द्वारा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत नये सिरे से तैयार किया जाएगा. इन स्टेशनों पर सभी तरह की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. ये प्राइवेट कंपनियां ही इन स्टेशनों का कॉमर्शियल ऑपरेशन करेंगी.
इन स्टेशन को किया जाएगा रिडेवलप
रेलवे के रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत जिन स्टेशनों को डेवलप किया जा रहा है, उसमें मुंबई, जयपुर, हबीबगंज, चंडीगढ़, नागपुर, बिजवासन और आनंद विहार रेलवे स्टेशन शामिल हैं. रेल मंत्रालय (Ministry of Railway ) ने इन रेलवे स्टेशनों को नये सिरे से तैयार करने के लिए प्लान भी तैयार कर लिया है. इन स्टेशनों पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल (PPP Model) के जरिये ग्राहकों को सभी आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी. इसके लिए प्राइवेट प्लेयर्स को बिडिंग के जरिए चुना जाएगा.

मुंबई सीएसटी के लिए बिडिंग मंगाई गई
इन स्टेशनों को डेवलप करने के बदले में कंपनियों को यहां पर कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स खोलने और स्टेशन यूजर फीस वसूलने की अनुमति दी जाएगी. सरकार ने मुंबई सीएसटी स्टेशन के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी (PPPAC) की बिडिंग प्रोसेस को शुरू भी कर दिया है. 20 अगस्त को IRSCDC ने इस स्टेशन के रिडेवलपमेंट के लिए पीपीपी मॉडल के तहत रिक्वेस्ट फॉर क्वॉलिफिकेशन मांगा है.
बाजार के हिसाब से तय होगा चार्ज
बता दें कि पिछले सप्ताह ही इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (IRSDC) ने कहा था कि रिडेवलप होने वाले स्टेशनों पर पैसेंजर यूजर चार्ज बाजार के हिसाब से तय होगा. इसके पहले कहा गया था कि जो कंपनियां रेलवे स्टेशनों का डेवलपमेंट करेंगी, वो एयरपोर्ट फीस की तरह चार्ज वसूल सकेंगी. इन स्टेशनों से ट्रेन के किराये में ही यह चार्ज वसूला जाएगा. यह भी कहा गया था कि ये चार्जेज इस बात पर भी निर्भर करेगा कि स्टेशन पर कितनी संख्या में पैसेंजर्स आते-जाते हैं.
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हालांकि, इसके बाद आईआरएसडीसी के प्रबंध निदेशक और सीईओ एसके लोहिया ने इन कयासों पर रोक लगाते हुए कहा था कि एक ही बार में ये चार्जेज फिक्स नहीं किए जाएंगे. खर्च के बढ़ने और घटने की संभावना लगातार बनी रहेगी. ऐसे में अगर कोई स्टेशन 60 साल के लिए दिया जाता है तो ये चार्जेज बाजार के हिसाब से तय होंगे.





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