मुजफ्फरपुर । शहर के दर्जनभर मोहल्ले एक पखवाड़े से गंदे पानी का तालाब बने हुए है। इन मोहल्ले में रहने वाले हजारों लोग नारकीय जीवन जी रहे हैं। जलजमाव के साथ-साथ अब उनको महामारी का खतरा सता रहा है। बालूघाट, सिकंदरपुर, अखाड़ाघाट, पानीकल रोड, चर्च रोड, चंदवारा, मिठनपुरा, बेला रोड, अतरदह, बीबी गंज, भगवानपुर में अभी भी एक से डेढ़ फीट पानी लगा हुआ है। शनिवार को बारिश नहीं होने से शहर के मुख्य बाजार मोतीझील, जवाहरलाल रोड, आमगोला, पक्की सराय के लोगों ने जरूर राहत की सांस ली। इन इलाकों से जमा पानी निकल गया है।
सबसे अधिक परेशानी शहर के पूर्वी एवं उत्तरी इलाके की है। नदी का पानी नहीं घटने से स्लूस गेट बंद है। जिससे हजारों घरों से निकलने वाला गंदा पानी बाध किनारे बसे मोहल्लों, यथा बालूघाट, सिकंदरपुर एवं चंदवारा में जमा हो रहा है। नाला एवं बारिश का पानी सड़ांध पैदा कर रहा है। इन इलाकों में पीने के पानी एवं शौचालय की समस्या भी हो रही है। जरूरी सामान की किल्लत हो गई है। लोगों को गंदे पानी के बीच से होकर जरूरी सामान के लिए निकलना पड़ रहा है।
नगर निगम इन मोहल्लों में जमा पानी निकालने के लिए दिनरात पंप चलाया जा रहा है। लेकिन पंप पूरी क्षमता से चलने के बाद भी जमा पानी को पूरी तरह से नहीं निकाल पा रहा है। निगम प्रशासन को उम्मीद है कि यदि बारिश नहीं हो तो जमा पानी का निकालने में सफलता मिल जाएगी।

एक कदम भी नहीं चल पाई महापौर की नई टीम :
एक साल पूर्व महापौर सुरेश कुमार ने अविश्वास प्रस्ताव में अपनी कुर्सी गंवा दी थी लेकिन उसके बाद हुए चुनाव में उन्होंने फिर से अपनी कुर्सी हासिल कर ली थी। दुबारा जीतने के बाद उन्होंने सशक्त स्थायी समिति का पुनर्गठन किया था। नई टीम में उन्होंने अपनी पुरानी टीम के एक भी सदस्य को शामिल नहीं किया। उनकी नई टीम में महापौर उम्मीदवार रहे वार्ड 46 के पार्षद नंद कुमार प्रसाद साह, वार्ड 42 की पार्षद अर्चना पंडित, वार्ड 4 के पार्षद हरिओम कुमार, वार्ड 33 की पार्षद रेशमी आरा, वार्ड 11 की पार्षद प्रमिला देवी, वार्ड 6 के पार्षद जावेद अख्तर गुड्डू एवं वार्ड 16 के पार्षद पवन कुमार राम को शामिल किया था। रविवार को उनकी नई टीम के गठन को एक साल पूरे हो गए। लेकिन महापौर की यह टीम एक साल में निगम को विकास के पथ पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा सकी। शहर पिछले पांच माह से कोरोना संकट से गुजर रहा है। शहरवासियों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए पूरे शहर को सैनिटाइज करने की जरूरत है। पिछले एक माह से शहर रह-रह कर बारिश के पानी में तैर रहा है। गंदगी शहरवासियों की सेहत खराब कर रही है। इन समस्याओं से निपटने में महापौर एवं उनकी टीम कहीं नजर नहीं आ रही है। इस समय समिति को अधिकारियों के साथ खड़ा होना चाहिए था लेकिन वे अपने-अपने वार्ड तक सीमित हैं। शहर की चिता उनको नहीं है। पिछले एक साल में समिति ने एक भी ऐसा फैसला नहीं लिया जो शहर को विकास के रास्ते पर ले जाए। वर्तमान हालात में उन्होंने शहरवासियों की सुध तक नहीं ली। साल में समिति के आधा दर्जन बैठक हुए लेकिन उसका परिणाम भी नजर नहीं आया। इस पर भी समिति के सदस्य मौन नजर आए।



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