अहियापुर में बूढ़ी गंडक का रिंग बांध टूटने के बाद एसकेएमसीएच सहित आधा दर्जन पंचायतों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है उत्तर बिहार का बहुपयोगी एसकेएमसीएच यदि बाढ़ की चपेट में आता है, तो लोगों के इलाज का संकट पैदा हो जाएगा। मंगलवार को अहियापुर के विजयी छपरा में बूढ़ी गंडक नदी का रिंग बांध टूटने के बाद पानी तेजी से मुख्य बांध के सहारे मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी एनएच 77 के टॉप तक पहुंचने लगा है। एनएच 77 के टॉप से यह पानी करीब एक फीट नीचे और और सड़क में कई जगह कट होने लगे हैं। यदि बाढ़ का पानी सड़क को काट देता है तो उत्तर बिहार का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा संस्थान एसकेएमसीएच बाढ़ की चपेट में आ जाएगा। इसके अलावा सड़क के पूरब रसुलपुर सालिन, सहबाजपुर, भीखनपुर, बखड़ी सहित बोचहां की कई पंचायतें प्रभावित हो सकती हैं। सीओ के निर्देश के बाद स्थानीय मुखिया व ग्रामीणों के सहयोग से लोगों ने सड़क को कटने से बचाने के लिए बड़ी संख्या में मिट्टी भरी बोरी डाल दी है।
लोगों ने खतरे को देखते हुए सीतामढ़ी की तरफ से जीरोमाइल जाने वाली सड़क को भारी वाहनों के लिए रोक दिया है। लोगों ने फ्लाईओवर के नीचे बांस बल्ला लगाकर उसे बंद कर दिया है। इधर, सिकंदरपुर में बूढ़ी गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर से अधिक ऊपर है और इसमें बढ़ोतरी ही है। यदि उत्तर बिहार व नेपाल में और बारिश हुई तो यह सिकंदरपुर के सीढ़ी घाट के पास ओवरफ्लो कर सकता है। इससे बाढ़ का खतरा शहर में भी पैदा हो गया है।

एसकेएमसीएच के डॉक्टरों को हुई देरी
बुधवार को जीरोमाइल से लेकर झपहां फ्लाईओवर तक बड़े वाहनों के चलने पर रोक लगने से एसकेएमसीएच के डॉक्टर व स्टाफ को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने बांस बल्ला लगाकार इस रोड में वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी, इसके बाद बुधवार को अधिकांश स्टाफ व डॉक्टर फोरलेन होते हुए एसकेएमसीएच आए। फोरलेन पर मिठनसराय व उसके आसपास के बाढ़ग्रस्त पंचायत के लोगों ने ठिकाना बना रखा है, जिसके कारण डॉक्टर व स्टाफ के वाहनों को निकलने में भारी कठिनाई हुई। जो स्टाफ व डॉक्टर 10 बजे एसकेएमसीएच पहुंचने का लक्ष्य लेकर चले थे, उन्हें वहां पहुंचने में 12 बज गए।
बूढ़ी गंडक का रिंग बांध टू’टने के बाद पानी एनएच 77 से जा सटा है। बूढ़ी गंडक का पानी वहां रिंग बांध व मुख्यबांध व सड़क के बीच फैल गया है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है, फिलहाल सड़क टू’टने की स्थिति नहीं है।
– राजीव कुमार चौरसिया, अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग



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