जिले में कोरोना का क’हर जारी है। हर दिन संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस बीच सोमवार को हुई भारी बारिश से एसकेएमसीएच व सदर अस्पताल के लिए एक और बड़ी मु’सीबत खड़ी हो गई। इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। इन अस्पतालों में जलजमाव होने से एक अलग संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है।
उत्तर बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल एसकेएमसीएच पूरी तरह जलमग्न हो चुका है, जबकि एक महीने पहले ही परिसर में एक करोड़ से अधिक की लागत से नाला निर्माण कराया गया था। इसके बावजूद कॉलेज परिसर में चार फीट पानी जमा है। माइक्रोलॉजी, एनाटॉमी व पैथोलोजिकल लैब समेत अन्य विभागों में भी तीन फीट पानी घुस गया है। लैब में पानी भर जाने से जांच में दिक्कत हो रही है। पैथोलॉजी विभाग में ब्लड जांच प्रभावित रहा। ब्वॉय व गर्ल्स छात्रावास भी चारों तरफ पानी से घिरा है। छात्रावास ए की छत से पानी टपक रहा है। विषैले सांप निकलने लगे हैं। डर के साये छात्राओं को रहना पड़ रहा है।
इधर, अस्पताल के इमरजेंसी समेत वार्ड 8 व 10 की भी छत से पानी टपक रहा है। इससे दो मंजिला भवन के फर्श पर पानी जमा हो गया है। इमरजेंसी वार्ड के बाहर व एमसीएच परिसर में भी पानी जमा हो गया। इससे मरीजों को आने-जाने में भी काफी कठिनाई हुई। एसकेएमसीएच के प्राचार्य व अधीक्षक कार्यलय के बाहर तीन फीट पानी लगा है। प्राचार्य डॉ. विकास कुमार ने बताया कि कॉलेज के कई विभागों में पानी घुस गया है। मोटर पंप लगाकर निकासी कराई जा रही है। पैथोलॉजी लैब में पानी जमा होने से जांच प्रभावित हुई है।

भारी बारिश से सदर अस्पताल भी बदहाल हो चुका है। पूरे परिसर व वार्डों में पानी भरा है। ओपीडी के मरीजों को डॉक्टरों तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। महिला वार्ड के अलावा पुरुष वार्ड में बनाए कैदी वार्ड में पानी जमा है। मरीजों को अपने सामान को बेड पर ही रखना पड़ा। स्वास्थ्य कर्मियों को भी पानी से होकर आना -जाना पड़ा। एक नर्स ने बताया कि कोरोना संक्रमण व जलजमाव दोनों आफत बन गए हैं, पर ड्यूटी तो करनी पड़ेगी। हेल्थ मैनेजर प्रवीण कुमार ने बताया कि मोतीझील व धर्मशाला चौक पर काफी जलजमाव है। इस कारण अस्पताल परिसर का पानी नहीं निकल पा रहा है। वहां से जलजमाव की समस्या दूर होने पर ही अस्पताल परिसर से पानी निकलेगा।



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