Chandra Grahan 2020 आषाढ़ पूर्णिमा के दिन लगने वाला उपछाया चंद्र ग्रहण 5 जुलाई 2020, रविवार को सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर शुरू होगा। इसके बाद ग्रहण सुबह 9 बजकर 59 मिनट पर अपने सबसे अधिकतम प्रभाव में होगा। चंद्र ग्रहण दिन के 11 बजकर 22 मिनट पर खत्म हो जाएगा। इस बार का ग्रहण दो घंटे 43 मिनट और 24 सेकेंड तक रहेगा। ज्योतिषविदों के मुताबिक इस साल 6 ग्रहण लग रहे हैं।
इसमें साल का तीसरा चंद्र ग्रहण रविवार, 5 जुलाई को लग रहा है। इससे पहले जून महीने में 5 जून को चंद्र ग्रहण लगा था, इसके बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण और अब एक बार फिर से चंद्र ग्रहण लग रहा है। भारत में चंद्र ग्रहण को नहीं देखा जा सकेगा। लेकिन यह चंद्र ग्रहण दूसरे देशों में सुबह 8 बजकर 38 मिनट से लगेगा। सुबह 9 बजकर 59 मिनट में ग्रहण का परम ग्रास होगा। दिन के 11 बजकर 21 मिनट पर उपच्छाया चंद्र ग्रहण समाप्त हो जाएगा। इस बार चंद्र ग्रहण पर गुरु पूर्णिमा का विशेष योग बन रहा है।
आषाढ़ पूर्णिमा। गुरु पूर्णिमा। दिन रविवार। इस दिन पिछले चंद्र ग्रहण से ठीक एक महीना बाद एक बार फिर से 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण लग रहा है। हालांकि इस चंद्रग्रहण का तात्कालिक प्रभाव भारत में नहीं देखा जा सकेगा। जबकि दुनिया के दूसरे हिस्से में यह ग्रहण सुबह 8:37 बजे शुरू होगा और सुबह 9:59 बजे अधिकतम ग्रहण ग्रास को प्राप्त करेगा। सुबह 11:37 बजे तक चंद्र ग्रहण समाप्त हो जाएगा। ग्रहण की कुल अवधि 2 घंटे 43 मिनट और 24 सेकेंड के लगभग होगी।
पूरे साल में अलग-अलग छह ग्रहणों को लेकर आए साल 2020 का जुलाई महीना एक और ग्रहण का गवाह बन रहा है। इस बार 5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। अभी से ठीक एक माह पहले 5 जून को चंद्र ग्रहण और 21 जून, रविवार को सूर्य ग्रहण लगा है। अब 5 जुलाई को फिर से चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह अपने साथ छोटे-बड़े कई प्रभाव लेकर आएगा।
सूतक काल नहीं होगा प्रभावी
इस बार चंद्र ग्रहण गुरु पूर्णिमा के दिन 5 जुलाई, दिन रविवार को लगने जा रहा है। इस चंद्र ग्रहण के बारे में सबसे खास बात यह है कि चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह ग्रहण उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा, जिसके भारत में दिखाई न देने के कारण चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी प्रभावी नहीं होगा।
2 घंटा 43 मिनट और 24 सेकेंड तक चंद्र ग्रहण लगेगा
5 जुलाई, दिन रविवार को लगने वाले साल 2020 के तीसरे चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 2 घंटा 43 मिनट और 24 सेकेंड तक होगी। इस बार लोग भारत में उपच्छाया चंद्र ग्रहण को नहीं देख पाएंगे। इस चंद्र ग्रहण को यूरोप, आस्ट्रेलिया और अमेरिका के बड़े हिस्से में आसानी से देखा जा सकेगा।

देव गुरु बृहस्पति धनु राशि में
ज्योतिषविदों का मानना है कि यह चंद्र ग्रहण धनु राशि में लग रहा है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक 30 जून को ही देव गुरु बृहस्पति धनु राशि में प्रवेश कर चुके हैं। इस राशि में राहू पहले से मौजूद हैं। ऐसे में चंद्र ग्रहण के दौरान बृहस्पति पर राहु की दृष्टि धनु राशि को सीधे प्रभावित करेगी।
मन में आएंगे नकारात्मक विचार, इष्टदेव का ध्यान करें
इस राशि के जातकों को चंद्रमा कमजोर होने से थोड़ी परेशानी उठानी पड़ सकती है। उनका मन अशांत होगा। नकारात्मक विचारों के चलते वे थोड़े समय के लिए अव्यवस्थित रहेंगे। धनु राशि और मित्र वर्ग के जातकों को इस अवस्था में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। वे अपने मन को एकाग्र रखने के लिए अपने अराध्य इष्टदेव का ध्यान लगाएं।
कई रहस्यों को समेटे है चंद्र ग्रहण
ज्योतिष विज्ञान की मानें तो इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण भी अपने में कई रहस्यों को समेटे है। यह चंद्र ग्रहण वर्ष 2020 का तीसरा चंद्र ग्रहण है, जो कि उपच्छाया है। उपच्छाया के बारे में कहा गया है कि इस तरह का चंद्र ग्रहण तब लगता है, जब सूर्य और चांद के बीच पृथ्वी आती है, लेकिन तीनों एक सीध में नहीं होते। एक लाइन में सीधे नहीं होने के कारण चांद के छोटी सी सतह पर छाया नहीं पड़ती है। जबकि चंद्रमा के बाकी हिस्सों पर पृथ्वी के बाहरी हिस्से की छाया अनवरत पड़ती रहती है। इसे ही उपच्छाया कहा जाता है।
चंद्र ग्रहण एक खास खगोलीय घटना
चंद्र ग्रहण एक खास खगोलीय घटना है। चंद्रमा जब पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है, तो चंद्र ग्रहण लगना कहा जाता है। इसे देखने के लिए कोई अतिरिक्त सतर्कता और विशेष सावधानी बरतने की जरूरत नहीं होती। चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखा जा सकता है।

भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण
5 जुलाई का चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। खगोल शास्त्र के मुताबिक चंद्र ग्रहण में जहां चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे होता है, वहीं सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से होकर गुजरता है। हालांकि इसे हम खुले तौर पर नहीं देख सकते। इसके लिए कई सावधानियों की जरूरत होती है। एक्सरे ग्लास, काला चश्मा, वेल्डिंग ग्लास आदि से सूर्य ग्रहण देखा जा सकता है।
भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान देवताओं में ऊपर
भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान देवताओं में ऊपर माना गया है। संत कबीर अपने दोहे गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागू पाय। बलिहारी गुरु अपने गाेविंद दियो बताय के माध्यम से व्यक्ति के जीवन में गुरु के महत्व को दर्शाया है। संत कबीर कहते हैं गुरु व्यक्ति के जीवन से अंधकार को दूर कर परमात्मा से मिलाता है। ईश्वर की महिमा गुरु के माध्यम से ही जान पाते हैं। अत: गुरु का स्थान देवताओं से भी श्रेयकर है। जीवन में हम जो कुछ भी प्राप्त करते हैं कहीं न कहीं गुरु की कृपा का ही फल है।
बेहद खास है गुरु पूर्णिमा
गुरु का मतलब शिक्षक से नहीं बल्कि गुरु माता-पिता, भाई, दोस्त किसी भी रूप में हो सकते हैं जिनका नाम सुनते ही हृदय में सम्मान का भाव जगता है। सम्मान प्रकट करने के लिए किसी दिन का नहीं बल्कि प्रत्येक दिन गुरु वंदनीय होते हैं। हालांकि, जीवन की आपाधापी में भौतिक रूप जीवन निर्माता के प्रति कृतज्ञता जाहिर करने का मौका नहीं मिलता है। ऐसे में गुरु पूर्णिमा वो खास दिन होता है जहां हम भौतिक एवं मन दोनों ही रूप से गुरु की वंदना, सम्मान करते हैं।
गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण का विशेष संयोग
आषाढ मास के पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। इसी दिन चारों वेद व महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म हुआ था। वेदों की रचाना करने के कारण इन्हें वेद व्यास भी कहा जाता है। वेद व्यास के सम्मान में ही आषाढ़ पूर्णि6का को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन गुरु पूजन का विशेष विधान है। इस बार गुरु पूर्णिमा पांच जुलाई को पड़ रहा है।
गुरु पूर्णिमा पर इस बार सूना पड़ा है मठ-मंदिर
गरु पूर्णिमा के दिन विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों की ओर से विशेष आयोजन कर गुरुओं के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है। संघ के स्वयं सेवक केसरिया ध्वज के समक्ष गुरु पूजन करते हैं। पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में भारी भीड़ होती है। वहीं, इस बार कोराना संक्रमण के कारण मंदिर जहां सूने हैं वहीं सार्वजनिक कार्यक्रम भी नहीं होगा। अधिकतर संस्थानों में ऑन लाइन गुरु पूजन की तैयारी चल रही है।
किस प्रकार होगा आयोजन, क्या है तैयारी
गुरु पूर्णिमा पर 20 हजार कार्यकर्ता ऑनलाइन सुनेंगे प्रवचन राज्य में आनंदमार्गियों की संख्या करीब 20 हजार है। इस बार गुरु पूर्णिमा पर आनलाइन सत्संग का आयोजन किया जाएगा। आचार्य सत्यश्रयानंद अवधूत के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर सुबह एवं शाम में आनंदमार्ग के पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत का प्रवचन होगा। आनंदमार्गी कार्यक्रम में ऑन लाइन भाग लेंगे।
शहीदों की आ’त्मा की शांति के लिए दी जाएगी विशेष आहूति
गुरु पूर्णिमा पर गायत्री परिवार के विभिन्न शक्ति पीठ एवं प्रज्ञा केंद्र पर विशेष अनुष्ठान होगा। शक्ति पीठ में सिर्फ नियमित कार्यकर्ता शारीरिक दूरी का पालन करते हुए अनुष्ठान में शामिल होंगे। जय प्रकाश नारायण के अनुसार गुरु पूजन के उपरांत शहीद सैनिकों की अात्मा की शांति हेतु यज्ञ कुंड में आहूति दी जाएगी। गायत्री महामंत्र का जाप किया जाएगा।



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