मुजफ्फरपुर। शनिवार की देर शाम पारू और साहेबगंज प्रखंड क्षेत्र में आसमान में उड़ते टिड्डियों के झुंड देखे जाने के बाद हड़कंप मच गया। डीएओ के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम कीटनाशी के साथ पारू और साहेबगंज के इलाकों में पहुंच कर स्थिति पर नजर जमाए हुए है। जबकि, फायर बिग्रेड की टीम को भी बुलावा भेजा गया है। विभाग की टीम, टिड्डी दल के फसलों पर आक्रमण की स्थिति में फायर बिग्रेड वाहन से क्लोरोपायारफॉस नामक कीटनाशी का छिड़काव करेगी। इधर, डीएओ डॉ. केके वर्मा ने पारू और साहेबगंज के अलावा मोतीपुर प्रखंड के अधिकारियों को भी अ’लर्ट कर दिया है।
डीएओ ने बताया कि इलाके में नजर रखी जा रही है। टिड्डी दल को भगाने के लिए तमाम उपाय अपनाने को विभाग तैयार है।
बताते चलें कि बक्सर और रोहतास के बाद मुजफ्फरपुर में भी टिड्डी दल देखे जाने की मिली सूचना के बाद डीएओ डॉ. केके वर्मा के नेतृत्व में कृषि विभाग की टीमें गांवों का दौरा कर टिड्डी दल की तलाश में शनिवार को पूरे दिन पसीने बहाती रही। हालांकि, दिन में कही भी टिड्डी दल नहीं मिला। लेकिन शाम ढलते ही पारू और साहेबगंज में टिड्डी दल देखे जाने के बाद हड़कंप मच गया। डीएओ डॉ. केके वर्मा ने दोनों प्रखंड में टीम भेज दी है। डीएओ ने कहा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। विभागीय कर्मी एक्शन मोड में हैं।

पलभर में चट कर जाता है फसल : टिड्डी दल हमेशा झुंड में चलता है। यह फसलों पर सामूहिक रूप से आक्रमण करता है। जानकार बताते हैं कि दो हजार व्यक्ति जितनी फसल को खाएंगे, टिड्डी दल प्रति किलोमीटर उतनी फसल एक दिन में चट कर जाता है। मादा टिड्डी एकबार में 150 से 200 अंडे देती हैं जिनसे 30 दिन में टिड्डी निकलीे हैं। अनुकूल परिस्थितियों में एक दल में करीब 8 करोड़ टिड्डिया होती हैं, जो हवा के रुख के साथ प्रतिदिन 150 किमी तक की यात्रा कर सकती हैं।
कृषि निदेशक द्वारा जारी की गई है एडवायजरी : टिड्डी के संभावित आक्रमण की आशंका के मद्देनजर कृषि निदेशक द्वारा पूरे बिहार में अलर्ट घोषित किया जा चुका है। किसानों के लिए टॉलफ्री नंबर 18001801551 जारी कर पौधा संरक्षण विभाग के उप निदेशक या डीएओ से संपर्क करने की सलाह दी गई है। साथ ही फसलों पर क्लोरोपायरीफॉस, लैम्बडासायहेलोथ्रीन, फिपरोनिल व डेल्टामेथ्रीन आदि का छिड़काव रात 11 से सुबह छह बजे तक करने को भी कहा गया है। जबकि, ग्रामीणों से टिड्डी दल की मौजूदगी की स्थिति में एकत्रित होकर ढोल, नगाड़े, तासे, टीन के डिब्बों, थाली आदि बजाने बचाते हुए शोर करने की सलाह दी गई है।



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