BIHARBreaking NewsInternationalSTATE

भारतीय अब कम कर रहे नेपाल में बेटियों की शादी, भारत-नेपाल के रिश्तों में आई क’ड़वाहट का असर

मधुबनी, प्रेमशंकर मिश्र। दो देश, मगर संस्कृति करीब-करीब एक जैसी। भाषा और रहन-सहन में भी समानता। यही वो बातें थीं जो भारत व नेपाल के संबंधों को सदियों से मधुर बनाए हुए थीं। रिश्तों की गहराई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता कि विवाह पंचमी पर हर साल अयोध्या से भगवान श्रीराम की बरात जनकपुरधाम आती है। मगर, इधर के सालों में बढ़ती कड़वाहट का असर वैवाहिक रिश्तों पर दिख रहा है। पहले बेहिचक बेटियों की शादी नेपाल में करते थे। अब पूर्व की तुलना में संख्या आधी से भी कम हो गई है। 

भारतीय क्षेत्र से अमूमन 40 से 50 बरात जाती थी नेपाल

सीमा पर बने भंसार (वाहन टैक्स) कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि चार-पांच वर्ष पहले लगन के दिनों में भारतीय क्षेत्र से अमूमन 40 से 50 बरात नेपाल जाती थी। इतनी ही संख्या में बरात नेपाल से भारत आती थी। विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार एक वर्ष में शादी के करीब 50 से 60 मुहूर्त होते हैं। इस वर्ष 56 विवाह मुहूर्त हैं।

इस हिसाब से करीब पांच से छह हजार शादियां होती थीं। मगर, हाल के वर्षों में नेपाल से बरात की संख्या पहले की तुलना में आधे से भी कम हो गई है। वहीं, भारतीय क्षेत्र से बरात जाने की संख्या में 15 से 20 फीसद तक गिरावट आई है। लॉकडाउन के चलते इस वर्ष शादी के मौसम फागुन (मार्च), चैत-बैशाख (अप्रैल व मई) व आषाढ़ (जून व जुलाई) में शादियां नहीं के बराबर हुईं।

प्रवेश शुल्क में वृद्धि व एपीएफ की तैनाती बड़ा कारण

नेपाल में ओली सरकार बनने के बाद भारत विरोधी कई नीतियां बनीं। भारतीय वाहनों के प्रवेश पर लगने वाले भंसार में वृद्धि कर दी गई। वहीं, एक वर्ष में 29 बार ही भारतीय वाहनों के प्रवेश नियमों ने भी यहां के लोगों का मोहभंग किया है। एक बाइक के लिए अब डेढ़ सौ व छोटे चार पहिया के लिए 352 रुपये देने पड़ रहे। इसके साथ ही सीमा पर नेपाल की एपीएफ (आम्र्ड पुलिस फोर्स) की तैनाती ने भय का वातावरण तैयार कर दिया है। जयनगर के राम मनोहर साह, सत्यनारायण गुप्ता कहते हैं कि नेपाल सरकार की हठधॢमता के कारण दोनों देश के बीच बेटी-रोटी के संबंध कमजोर पडऩे लगे हैं। कई रिश्तेदारियां वहां हैं। मगर, नए संबंध को लेकर सोचना पड़ रहा। धमियांपत्ति के समाजसेवी विनय कुमार ठाकुर कहते हैं, नेपाल सरकार का कानून दोनों देश के संबंधों को कमजोर कर रहा है।

खटास दूर करने के हो रहे प्रयास

भारत-नेपाल मैत्री संघ के धनुषा जिलाध्यक्ष सह लघु उद्योग संघ के कार्यकारी अध्यक्ष उमेश प्रसाद सिंह, मैत्री संघ के सिरहा जिलाध्यक्ष संतोष अग्रवाल, धनुषा समाजवादी पार्टी के केंद्रीय सदस्य डॉ. विजय कुमार सिंह आदि दोनों देशों के संबंधों को फिर से प्रगाढ़ करने पर काम करना प्रारंभ कर दिया है। कोरोना संक्रमण काल समाप्त होने के बाद विभिन्न मसलों पर नेपाल सरकार से वार्ता कर आगे की रणनीति पर काम होगा। संघ को विश्वास है कि दोनों देश के बीच सदियों से कायम बेटी-रोटी के संबंध बरकरार हो जाएंगे।

संविधान लागू होने के बाद से आने लगा बदलाव

नेपाल में राजतंत्र के वि’रोध में 1996 में प्रारंभ हुए माओवादी आंदोलन के समय से ही भारत विरोधी अभियान को गति मिलनी शुरू हो गई थी। राजतंत्र के खात्मे के बाद वर्ष 2015 से नेपाल में संविधान लागू होने के बाद से चीजें बदलने लगीं। पहाड़ी समुदाय के लोगों का वर्चस्व बढ़ा। भारतीय मूल के लोगों के प्रति दोहरे व्यवहार का बीज भी यहीं से पड़ा। भारतीय लड़कियों को शादी के बाद नेपाल की नागरिकता के लिए कम से कम सात वर्ष की समय-सीमा बांध दी गई। पहले ये बाध्यता नहीं थी। इसके बाद से संभ्रांत लोगों ने बेटियों की शादी कम करनी शुरू कर दी।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.