Auto tipper purchase scam में महापौर सुरेश कुमार, तत्कालीन कनीय अभियंता भरतलाल चौधरी व प्रमोद कुमार सिंह के खि’लाफ दाखिल आ’रोप पत्र की सुनवाई 30 जून को होगी। विशेष न्यायालय निगरानी इस आ’रोप पत्र के संज्ञान की बिंदु पर सु’नवाई कर सकती है। सु’नवाई के बाद इस पर संज्ञान ले सकती है। संज्ञान के बाद आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
पूरे मामले में चला बड़ा खेल
ऑटो टिपर खरीद के मामले में शुरू से ही बड़ा खेल चला। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अपनी जांच में इस खेल को उजागर किया है। नगर निगम को 3.50 करोड़ तक की ही निविदा स्वीकृत करने का अधिकार है। इसके विपरीत 3.85 करोड़ की निविदा को स्वीकृति दी गई। जांच में यह भी बात सामने आई है कि निर्धारित तिथि के समाप्त होने के बाद ऑटो टिपर की आपूर्ति की गई।

कई स्तर पर अनियमितता
तत्कालीन प्रभारी नगर आयुक्त डॉ.रंगनाथ चौधरी ने आनन-फानन में 16 जनवरी 2018 को एक करोड़ 72 लाख 70 हजार 848 रुपये का भुगतान कर दिया। उन्होंने भुगतान का आदेश तब दिया जब सरकार की ओर से मुजफ्फरपुर नगर निगम के नए नगर आयुक्त की पदस्थापना के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई थी। नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव ने उक्त निविदा व आपूर्ति आदेश को रद कर दिया था। आरोपित भरतलाल चौधरी सिविल अभियंता थे। क्रय समिति में सदस्य बनाए गए थे। जबकि क्रय समिति में यांत्रिक व ऑटो इंजीनियर को शामिल किया जाना था।
इस तरह शुरू हुआ मामला
वर्ष 2017 में शहर की सफाई के लिए नगर निगम की सशक्त स्थायी कमेटी ने 50 ऑटो टिपर खरीदने का प्रस्ताव पारित किया गया। निविदा में तिरहुत ऑटोमोबाइल माड़ीपुर, मेसर्स न्यू भारत इंजीनियङ्क्षरग सॉलिड बेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड कुरुक्षेत्र व मेसर्स मौर्या मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड पटना ने भाग लिया। निविदा खुलने पर न्यूनतम दर वाले तिरहुत ऑटोमोबाइल माड़ीपुर को प्रथम स्थान मिला। इसके विपरीत मेसर्स मौर्या मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड पटना को आपूर्ति आदेश दिया गया। तिरहुत ऑटो मोबाइल के प्रोपराइटर ने इसी के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत की थी। उसने आरोप लगाया था कि तत्कालीन नगर आयुक्त ने उससे प्रति टिपर 15 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। यह राशि नहीं देने पर दूसरे नंबर वाले को आपूर्ति आदेश दे दिया गया।



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