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#MUZAFFARPUR: विगत 6 वर्षो से एईएस को शि’कस्त दे रही पुष्पा, इस वर्ष क्षेत्र में चमकी के एक भी मरीज नहीं…

विगत 6 वर्षो से एईएस को शि’कस्त दे रही पुष्पा
– इस वर्ष इनके क्षेत्र में चमकी के एक भी मरीज नहीं
– पिछले वर्षों के बच्चों का कराती हैं फॉलोअप

मुजफ्फरपुर। 11 जून: एईएस बच्चों को ही अपना शिकार बनाता है। यह रोग वैसे बच्चों को अपने शिकंजे मे लेता है जो कुपो'षित होते हैं या तो छोटे होने के कारण क'मजोर। एईएस की शुरुआत से ही जिस एक व्यवहार ने इस पर विजय पायी है। वह है जागरुकता। जागरूकता इस बीमा'री के उपचार की वह कड़ी है जो एईएस से बच्चों को सुरक्षित रखने में मदद करती है। विगत छह वर्षों से इसी जागरूकता को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं मोरसंडी एचएससी में कार्यरत एएनएम पुष्पा। पुष्पा कहती हैं, उनकी 2014 में मोरसंडी में नियुक्ति हुई थी। उसी समय से वहां चमकी का प्र'कोप भी बढ़ने लगा। तब से लेकर आज तक वह चमकी पर लगातार जागरुकता फैला रही है। अभी मेरे टीम में 11 सेविका और 10 आशा समेत 21 लोगों की टीम है। जिसपर 12000 लोगों के बीच चमकी को लेकर जागरुकता फैला रही है.

निरंतर जागरूकता ही है समाधान:

पुष्पा बताती हैं वह प्रत्येक 3 से 4 दिन में गांव में जाकर बैठक करती है। जिसमें विशेषकर आर्थिक एवं सामजिक रूप से पिछड़े टोलों के 10 से 20 लोगों को शामिल उन्हें जागरुक करती है. उनका कहना है जागरुकता में वह दो दो बातो पर ज्यादा ध्यान देती है। एक तो कि रात को बच्चों को भूखे सोने न देना एवं दूसरा कि चमकी के लक्षण आने पर जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना। उन्होंने बताया आशा अपने क्षेत्र में तो प्रतिदिन जागरुकता फैलाती हैं एवं इसकी रिपोर्टिंग भी उन्हें करती हैं। ऐसे भी यह जरुरी है कि प्रतिदिन लोगों को चमकी के प्रति जागरुकता मिलनी चाहिए। तक जाकर उनमें बचाव को लेकर आदत आएगी। वहीं वह कुछ भी होने पर तुरंत रेस्पांस करेगें। यही कारण है कि अभी तक उनके क्षे़त्र से एक भी एईएस पीड़ित बच्चा नहीं मिला है। पिछले साल जो चार बच्चे मिले थे उनका भी फॉलोअप हो रहा है वे अब बिल्कुल ठीक है।

प्रत्येक शनिवार को मिलती है चमकी को धमकी:पुष्पा कहती हैं , उनका प्रखंड मोतीपुर चमकी के अतिप्रभावित इलाकों में आता है। जागरुकता तो प्रत्येक साल अच्छी तरह से फैलायी जाती थी, पर इस साल का प्रशास न और स्वास्थ्य विभाग ने चमकी को धमकी देने की जो योजना बनाई है वह काबिले तारीफ है। इसमें प्रत्येक शनिवार को इस साल प्रशासन की तरफ से प्रत्येक शनिवार को मोरसंड में डॉ सतीश आते हैं। यह इनका गोद लिया गांव है। जिसमें बैठक होती है और लोगों को चमकी के प्रति जानकारी मिलती है। जिसका असर इस वर्ष देखने को मिल रहा है। अभी तक इस इलाके में एक भी चमकी का मरीज नहीं आया है। अगर इसी तरह जागरुकता फैलती रही तो वह दिन भी दूर नहीं जब चमकी को हम जड़ से उखाड़ फेकेगें।

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