बोकारो : बोकारो मृ’त कर्मचारी आश्रित संघ ने एकमुश्त नियोजन के अपने मांग पर आवाज बुलंद करते हुए बोकारो स्टील प्रशासनिक भवन के समक्ष बोकारो प्रबंधन के अड़ियल रवैये के खिलाफ थाली एवम् ताली बजाकर विरोध प्रदर्शन किया तथा स्थानीय टू-टैक गार्डन मे विरोध सभा का भी आयोजन किया ।
सभा को संबोधित करते हुए क्रान्तिकारी इस्पात मजदूर संघ (एच एम एस ) के महामंत्री सह सदस्य एनजेसीएस राजेन्द्र सिंह ने कहा कि जनवरी माह मे जब सेल/बोकारो प्रबंधन पर दबाव बढ़ा तो उन्होंने बिना आयु सीमा के एकमुश्त सभी आश्रितो के नियोजन के लिए मान गई और हमारे अलावे तीन और एनजेसीएस (बीएमएस,एटक एवम् सीटू) युनियन की सहमति से प्रपोजल बनाकर कार्पोरेट आफिस भेज दिया तथा सभी को यह आश्वासन दिया कि एक माह के अंदर इस प्रपोजल पर सहमति कार्पोरेट आफिस से आ जाएगी ।उसके बाद हमलोग एकमुश्त नियोजन की प्रक्रिया को आगे बढायेगे।मगर दुर्भाग्य की बात है कि आज तक न तो कार्पोरेट आफिस से कोई स्वीकृति आई और न ही बोकारो स्टील प्रबंधन ने कोई दिलचस्पी ही दिखाई ।बस एक बहाना लेकर बैठ गई कि कोरोना के कारण काम नही हो पा रहा है ।

आप सोच सकते है कि कोरोना के वर्तमान समय मे ही हमारी सेना दुश्मनो से लोहा ले रही है और उन्हे धुल भी चटा रही है ।मगर इस निकम्मी सेल/बोकारो स्टील प्रबंधन से एक लेटर भी टाईप नही हो पा रहा है। हमारे अधिशासी निदेशक (कार्मिक एवम् प्रशासन ) केवल दिन काट रहे है ।वो सोच रहे है कि 30 जून को रिटायर होना है कौन झमेला लेगा?मगर ईडी साहब ये भूल गए कि वो एक जिम्मेदार पद पर बैठे है जहा कुर्सी से व्यक्ति की पहचान होती है ।ऐसे मे उन्होंने जो वादा किया था वो बोकारो स्टील के ईडी का वादा था किसी व्यक्ति का नही ।इसलिए न तो ईडी साहब अपने वादे से मुकर सकते है और न ही सेल /बोकारो प्रबंधन । उन्होंने कहा कि सेल एक महारत्ना कंपनी है और अगर इसी प्रकार चलती रही तो आप समझ सकते है कि इसमे काम करने वाले मजदूरो का भविष्य क्या होगा? उन्होंने प्रबंधन को आगाह करते हुए कहा कि अगर जल्द से जल्द अगर सेल /बोकारो प्रबंधन उक्त प्रपोजल पर आगे बढते हुए सभी आश्रितो को एकमुश्त नियोजन नही देता है तो फिर यह लड़ाई सड़क से उठकर प्लांट पहुंच जाएगी ।सभा को श्री सिंह के अलावे श्री कृष्णा राय, श्री बी डी प्रसाद एवम् श्री रामाशरय सिंह ने भी संबोधित किया ! मौके पर चंद्र प्रकाश कुमार मालाकार कुमार ताजुद्दीन अंसारी नीरज चौबे एवं अन्य सैकड़ों आश्रित|
संवाद सूत्र : नितेश वर्मा



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